
Beautiful beauty of the Sundar river, growing birds and skylarks
मडिय़ादो. दिसंबर माह में कुंडों में तब्दील हो जाने वाली सुनार नदी पंचम नहर परियोजना के तहत पानी छोडऩे के बाद गर्मी के इन दिनों में भी इसकी जलधारा कलकल बह रही है। जहां मार्च अप्रैल में इस नदी में पिछले वर्ष तक पानी नहीं हुआ करता था, अब वहां पर्याप्त पानी देखा जा सकता है। इन दिनों नदी की यह तस्वीर देखकर नदी के पुनर्जीवित होने कहानी बयां हो रही है। यहां पानी की पर्याप्त उपलब्धता को देखर प्रवासी पक्षियों ने अपना डेरा जमा लिया है। नदी के किनारे व बीच में निकले टापुओं पर विभिन्न प्रकार के जलीय पक्षियों को बैठा देख जा सकता है और इसे देखकर हर कोई आकर्षित हो रहा है। स्टॉर्क फैमिली की करीब १९ प्रजातियों में से एक व्हाइट पक्षी और चकवा चकवी के जोड़े मुख्य हैं। सुनार नदी में हटा मडिय़ादो मार्ग पर बड़े पुल पर निकलने वाले मुसाफिर इन पक्षियों को देखकर ठहर जाते हैं और प्रकृति का पूरा आंनद लेते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार हरियल परिवार सिकोनीडाय में एक बड़ा पक्षी है। जानकार बताते हैं कि ऊनी मुंहदार सारा 75-92 सेंटीमीटर लंबा एक मध्यम आकार का सारस है। इसकी गर्दन के डिजाइन के कारण इसे ऊनी मुंहदार सारस नाम दिया गया है। यह एक व्यापक उष्टकटिबंधीय प्रजाति है, जो एशिया में पैदा होती है। भारत से इंडोनेशिया तक और उष्णकटिबंधीय अफ्रीका में यह वृक्षों के साथ झीलों तथा बारहमासी जलाशयों और दलदल फसल की भूमि सिंचाई नहरों और नदियों सहित विभिन्न प्रकार के मीठे पानी के स्थलों पर रहवास करते हैं। इसी नदी में चकवा चकवी के एक दर्जन से अधिक जोड़े नदी में तैरते देखाई दे रहे हंै। खास बात यह है कि चकवा चकवी का जोड़ा रात्रि में अलग अलग हो जाता है। कहावत है इन्हें ऐसा श्राप है कि यह रात्रि में एक साथ नहीं रह सकते।
Published on:
02 Apr 2019 08:17 am

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