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बजट 2026 के पहले: गरीब को सब्सिडी से राहत नहीं, इधर रोजगार के बिना अधूरी तस्वीर

अब सब्सिडी भी कर रही परेशान, गैस पर तीन माह से नहीं, बिजली की भी रामभरोसे

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दमोह

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Samved Jain

Jan 16, 2026

Budget 2026-27

Budget 2026-27 (Photo Source - Patrika)


दमोह. गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का असर पिछड़े अंचल में साफ दिखाई देता है। दमोह जिले के शहरी स्लम से लेकर ग्रामीण इलाकों तक राशन, आवास और गैस सब्सिडी ने लोगों को देने का दावा तो किया जाता है, लेकिन असल में इसका लाभ भी राशन को छोड़कर बिजली और गैस में लोगों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में बजट से गरीब लोगों को सबसे ज्यादा आस है कि उनके के लिए शर्तों और सब्सिडी से दूर कुछ अधिक सोचने की जरूरत सरकार को है।
-राशन से गुजर बसर, लेकिन आमदनी जस की तस
जिले के कई ग्रामीण परिवारों की थाली आज भी सरकारी राशन पर निर्भर है। मुफ्त गेहूं चावल मिलने से भूख की चिंता कम हुई है, लेकिन रोजगार के अभाव में परिवार की आय नहीं बढ़ी है। राशन मिल जाता है, पर काम पूरे महीने नहीं मिलता। बच्चों की फीस और दवा के लिए निम्न आय वाले परिवारों को कर्ज लेना पड़ता है।

  • पक्का मकान मिला, रोजगार नहींप्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दमोह जिले में हजारों पक्के मकान बने हैं। कच्ची झोपडिय़ों से निकलकर पक्के घर में रहना लोगों के लिए सम्मान की बात है, लेकिन आवास मिलने के बाद भी रोजगार के साधन नहीं बढ़े। कई परिवार आज भी दिहाड़ी मजदूरी या पलायन पर निर्भर हैं।
  • उज्ज्वला से धुएं से मुक्ति, अब सब्सिडी भी अटकीउज्ज्वला योजना से महिलाओं को गैस कनेक्शन मिला, जिससे रसोई का काम आसान हुआ। हालांकि, सिलेंडर की कीमत गरीब परिवारों के लिए अब भी बड़ी चुनौती है। ग्रामीण महिलाएं बताती है कि कनेक्शन तो मिल गया, लेकिन हर महीने गैस भरवाना मुश्किल है, इसलिए कभी-कभी चूल्हा जलाना पड़ता है। बीत तीन महीने से सब्सिडी भी नहीं आई है।
  • बिजली पर सब्सिडी, लेकिन एक यूनिट अधिक पर पूरी वसूलीशासन के निम्न आय वर्ग के लोगों को बिजली पर सब्सिडी दी गई है। १५० यूनिट तक यह निर्धारित की गई है, लेकिन १५१ यूनिट बिजली खपत होते ही पूरे यूनिट का फुल बिल वसूला जा रहा है। जो कि इस वर्ग के लोगों के लिए सबसे ज्यादा परेशान करता है। ऐसे में लोग चाहते है कि जब १५० यूनिट तक बिल २०० रुपए तय है तो इससे अधिक होने पर सिर्फ अधिक यूनिट का बिल लिया जाए, न कि १५० यूनिट भी इसी में जोड़ा जाए। ऐसी सब्सिडी से पूरे साल का बिल एक-दो बिलों में ही कंपनी वसूल कर लेती है।

क्या कहते है लोग

  • तीन महीने से गैस की सब्सिडी नहीं आई है। केवायसी भी करा ली है, लेकिन सब्सिडी नहीं आ रही है। इसके लिए बैंक, गैस एजेंसी तक के अनेक चक्कर लगा लिए, लेकिन कोई सकारात्मक उत्तर नहीं मिल रहा है। पहले २०० से ३०० रुपए तक सब्सिडी आ जाती थी, अब ९०० का सिलेंडर पड़ रहा है, ऐसे में गरीबों को कुछ लाभ नहीं मिल रहा है।बबली जाटव, गृहणी
  • गैस और बिजली की सब्सिडी के नाम पर सिर्फ धोखा ही होता है। गैस की सब्सिडी पहले मिलती थी, अब सिर्फ ६ रुपए आती है। इधर, बिजली की सब्सिडी १५० यूनिट के बाद पूरा पैसा वसूल कर लेती है। २००० से ३००० रुपए तक के बिल आते है। शासन को निम्न आय वाले व्यक्तियों की बिल्कुल भी फिक्र नहीं है। इस तरह सब्सिडी का फेर खत्म कर सीधा लाभ मिलना चाहिए।रविता बाई, गृहणी

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