
Buffer area farmer worried by wildlife
दमोह/मडिय़ादो. बफरजोन क्षेत्र में आने वाले गांवों के किसानों को खेती की रखवाली करना परेशानी का कारण बन रहा है। अंचल के कलकुआ, घोघरा, बछामा, चौंरईया, पाटन, रजपुरा, नारायणपुरा व बर्धा गांवों के किसानों को नीलगाय और जंगली सुअरों के आतंक के कारण फसलों की दिन रात रखवाली करना पड़ रही है।
इन दिनों वनांचल क्षेत्र में ज्वार और अरहर की फसल की रखवाली करना पड़ रही है। ज्वार में भुन्टा आ चुके हंै जिसे चट कर रहे हैं।
किसानों की माने तो सुअरों से फसलों की रखवाली करना खतरनांक होता है। क्योंकि इंसान पर हमला करने से भी नहीं चूकता अगर मुकाबला इंसान से हो जाए तो भारी पड़ जाता है।
रतिराम आदिवासी, हल्कू आदिवासी की मानें तो ज्वार की फसल को सबसे अधिक ***** और नीलगाय के झुंड नुकसान पहुंचा रहे हैं। नीलगाय तो इंसानों की आवाज से डर कर भाग जाते हैं, लेकिन बहुत खतरनांक होता है। सुअरों को खेतों से भगाना मुश्किल हो रहा है। हमले के डर से बचने के लिए खेतों में मचान बना कर फसलों की रखवाली करना पड़ रही है।
मुआवजा भी नहीं मिलता-
किसानों की माने तो वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाना अपराध है। लेकिन फसलों के नुकसान की भरपाई विभाग के द्वारा नहीं की जाती । विभाग की कागजी कार्रवाई बहुत होती है इससे कोई भी आदिवासी किसान आज तक वन विभाग से जंगली जानवरों द्वारा की गई फसलों के नुकसान का मुआवजा नहीं ले सका।
Published on:
14 Oct 2018 05:33 pm
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