
बुंदलेखंड में फिल्म निर्माण, शूटिंग के अनेक लोकेशन, बदलेगा परिदृश्य मैं अखबार का ही प्रोडक्ट हूं, युवा अखबार जरूर पढ़े दमोह में बुंदेलखंड फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने पहुंचे
दमोह. दमोह में आयोजित बुंदेलखंड फिल्म फेस्टिवल व कलाकार समागम कार्यक्रम में शामिल होने मशहूर अभिनेता और बुंदेलखड़ के मुन्ना भैया मुकेश तिवारी दमोह पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने पत्रिका से खास बातचीत करते हुए बुंदेलखंड में फिल्म निर्माण, यहां के कलाकारों, बुंदेलखंड दर्शन, स्कोप और खुद के समर्पण सहित अन्य बिंदुओं पर बेबाकी से अपनी रखी। पत्रिका संवाददाता संवेद जैन के सवालों पर क्या रहे मुकेश तिवारी के जवाब, पढिए…
सवाल: बुंदलेखंड के नाम पर मुकेश तिवारी फ्रंट लाइन पर होते है?
जवाब: बुंदेलखंड के लोग अपना मानते हैं मुझे और मुझे भी अच्छा लगता है अपने लोगों के साथ। ये जुड़ाव है अपनी माटी से, मेरी जड़े यही हैं।
सवाल: फिल्म फेस्टिवल और समागम के माध्यम से बुंदेलखंड में क्या बदलाव होगा?
जवाब: यह एक विचार है। विचार रखा गया है। अब उसका पल्लवन, आगे पनपना, उसका वृक्ष बनना ये सब चीते निरंतरता पर निर्भर करती है। इस तरह से नहीं हो सकता कि आज नींव डाली और कल से लाभ मिलने लग जाए। यह एक जनजागृति है। यह एक अच्छा प्रयास है।
सवाल: बुंदेलखंड को लेकर क्या प्लानिंग हो सकती है?
जवाब: बुंदलेखंड बहुत बड़ा क्षेत्र है, यह सागर संभाग तक सीमित नहीं है। एक फोटो शूट, एब्लम बनाकर सभी प्रोड्यूसर, डाइरेक्टर पर भेजने की बात संस्कृति मंत्री से हुई है। इससे फिल्म शूटिंग के आगे रास्ते खुलेंगे। जैसे भोपाल है, वहां अधिकांश शूट पुराने जेल में होते है। यहां के लोग व्यवधान पैदा नहीं करते है, अच्छे लोग है।
सवाल: फिल्म निर्माण की संभावनाएं कितनी है यहां?
जवाब: बुंदेलखंड और आसपास कनेक्टिविटी भी अच्छी हो गई है। जबलपुर में एयरपोर्ट हो गया है। जो कि शूटिंग के लिए सबसे ज्यादा महत्व रखता है। हर जिले में अच्छी होटलें हो गई हैं। बुंदेलखंड में एक से बढ़कर एक लोकेशन हैं ही। संभावनाएं अनंत है बुंदेलखंड में, आगे यह देखने भी मिल सकता है।
सवाल: अभिनय के क्षेत्र में अब युवा बहुत आगे आ रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर दिखते हैं, इनके लिए क्या मौका हैं?
जवाब: सोशल मीडिया के माध्यम से काफी युवाओं को मंच मिला है, जिनकी कला हम लगातार देख पा रहे हैं। यह अभिनय के क्षेत्र में आगे आना ही हैं, इन्हें निश्चित ही अब एक मौके पर तलाश हैं, जिससे कि वह अपने आप को निखार पाए। बुंदेलखंड के युवा कंटेट को लेकर परिपक्व और परिपूर्ण है। आगे बढ़े, सफलता मिलेगी।
सवाल: कई अभिभावक बच्चों को अभिनय में आने से रोकते हैं, क्योंकि उसमें भविष्य का सवाल आता है?
जवाब: मैं किसी को शिक्षा नहीं देता हूं, लेकिन कहना चाहूंगा कि कला और नए क्षेत्र में जो युवा आते हैं, उसकों हीन दृष्टि से न देखें, प्रोत्साहित करें। आपका प्रोत्साहन कई अद्भुत कलाकार पैदा कर सकते हैं। उन्हें इस बात के लिए बाध्य न किया जाए कि जीविका कैसे चलेगी। यदि उनके अंदर साहस है, नवाचार की स्थिति है, तो उत्साहित करें।
सवाल: अखबार आपकी पसंदीदा चीजों में से है, क्या यह सच है?
जवाब: मैं अखबार का ही प्रोडक्ट हूं। मैं अभी भी निरंतर तौर पर अखबार पढ़ता हूं। दरअसल, पढऩे की प्रक्रिया, रोपने की प्रक्रिया है, जो आपके अंदर तक जाती है। देखकर आप कुछ समय रख सकते हैं, लेकिन जो आप पढ़ते हैं, उसकी तहें आपके मस्तिष्क में बैठ जाती है। युवा पीढ़ी से कहना चाहूंगा कि न्यूजपेपर को अपनी जीवन शैली का अंग बनाए, वहीं एडिटोरियल पढ़े या लोकल न्यूज पढ़े। उससे एक दृष्टिकोण बनता है, एक शब्दकोश बनता है, नए शब्दों का ज्ञान होता है। साथ ही नए विचारों से भी रूबरू होते हैं।युवा होने के नाते आप ज्यादा कल्टीवेट चीजें कर सकते हैं। इसे सिर्फ जनरल नॉलेज नहीं बढ़ती, सामाजिक ज्ञान भी बढ़ता है।
Published on:
11 Jan 2026 11:39 am
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