
CHANDIYA Clay water vessel quenching thirst of bundelkhand people
दमोह. दमोह जिले में चंदिया के मटकों की खनक पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। लोग बताते हैं कि जब दमोह-कटनी-बिलासपुर रेल लाइन का विस्तार हुआ और भोपाल-पैंसेजर ट्रेन का विस्तार हुआ तो इस रेल खंड के एक छोटे से स्टेशन चंदिया के कुंभकारों द्वारा बनाए गए मटके व सुराही बुंदेलखंड, बघेलखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट व यूपी तक हर गर्मी में अपनी धाक जमाने पहुंचने लगे
सबसे प्रसिद्ध है चंदिया की सुराही व मटके, इसके अलावा अचार रखने के लिए काले मटके भी बिक्री के लिए आते थे, लेकिन अब दमोह जिले में चलन से बाहर हो गए हैं, इसलिए कारीगर यहां के मटके व सुराही लेकर पहुंचते हैं। दमोह में चंदिया के मटकों की डिमांड पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्व अनुभव के आधार पर बनी हुई है। चंदिया के इन मटकों की तासीर फ्रिज जैसा ठंडा पानी रखने की है। इसलिए जिनके घरों में फ्रिज भी हैं, वे चंदिया की सुराही व मटकों का पीना ही स्वास्थ्य की दृष्टि से भी करते चले आ रहे हैं।
कटनी से बिलासपुर ? मार्ग की रेल यात्रा के दौरान एक छोटा सा स्टेशन चंदिया पड़ता है। चंदिया स्टेशन के आते ही चारों तरफ चंदिया की सुराही व मटकों को बेचने वाले लोगों की भीड़ लग जाती है। इनकी प्रसिद्धि इतनी अधिक है कि चंदिया पहुंचते ही यात्री प्लेटफार्म की ओर झांकने लगते हैं। चंदिया की सुराही व मटकों को ग्रीष्म कालीन फ्रीज के नाम से जाना जाता है। यात्रा के दौरान कई देशी, विदेशी यात्री इन सुराहियों को साथ लेकर चलते हैं। कई बार बस या ट्रक के ड्राइवर भी पानी से भरी हुई सुराही साथ लेकर चलते हैं। इन सुराहियों एवं मटकों की खनक बुंदेलखंड के जिलों में गूंज रही है। गौरतलब है कि लोग मटका खरीदते समय उस अंगुलियों के पिछले हिस्से या हथेली से बजाकर देखते हैं, जिससे एक खनखनाहट निकलती है। इस खनखनाहट से पता चलता है कि मटका मजबूत है या कच्चा। दमोह में कीर्ति स्तंभ के पास जेपीबी स्कूल के पास चंदिया के मटकों की दुकान लगी हुई है। जिन्हें ट्रकों में लादकर लाया गया है। बताया जाता है कि चंदिया गांव की मिट्टी काफी लचीली होती है जिससे मटकों व सुराही में कलात्मकता का इस्तेमाल होता है। चंदिया के मटके चिकने होते हैं, जबकि बुंदेलखंड की माटी में बनने वाले मटके ऊपर से खुरदरे और लाल रंग हल्का दिखाई देता है, जबकि चंदिया के मटकों का रंग चमकता रहता है।
मटकों में लगे हैं नल
चंदिया के मटका बनाने वालों ने एक नया प्रयोग किया है। प्याऊ व स्टैंड पर रखे जाने वाले मटकों में नल लगाए गए हैं। इन नलों के उपयोग से मटके में किसी बर्तन से पानी निकालने की जरुरत नहीं पड़ती है और नल से पानी लेने में शुद्धता बनी रहती है। इस बार सबसे ज्यादा पूछपरख नल लगे मटकों की हो रही है।
सुराही हो गई हुस्ट-पुष्ट
चंदिया की सुराही पहले काफी पतली आती थी, लेकिन अब चंदिया की मोटी सुराही मार्केट में है, जिससे लोग जब इनकी पूछ परख करते हैं तो मजाक में कहते हैं कि अब चंदिया की सुराही में भी मोटापा छाने लगा है।
Published on:
25 Apr 2018 09:50 am

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