
जिला पुलिस बल
दमोह. जिला पुलिस बल में विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में शामिल होकर १२५ महिला पुरूषों ने लॉ इन ऑर्डर का पालन कराने में अपनी महती भूमिका निभाई। यह पहला अवसर १० अप्रैल को जिले के हटा में देखने को मिला है, जब समाज में अपनी विशेष भूमिका निभाने वाली महिलाओं व कॉलेज में अध्ययनरत युवाओं, रिटायर्ड पैंशनर्स, ने पुलिस अधिकारी के रूप में खड़े होकर सुरक्षा कड़ी को मजबूत किया।
एसपी विवेक अग्रवाल ने बताया है कि पुलिस रैग्यूलेशन के तहत यह प्रक्रिया अपनाई गई थी। इस प्रक्रिया के तहत ऐसे लोग जो पुलिस के रूप में सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनने की रूचि रखते हैं उन्हें विशेष मौके पर पुलिस अधिकारी के रूप में शामिल किया जाता है। उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग द्वारा ऐसे लोगों के नाम कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं और मजिस्ट्रेट आदेश पर उन्हें विशेष पुलिस अधिकारी बनाया जाता है।
हटा में पहला प्रयोग
पुलिस रैग्यूलेशन की धारा १७ के तहत अपनाई गई इस प्रक्रिया का पहला प्रयोग जिले में हटा में किया जाना सामने आया है। हटा थाना टीआई प्रदीप सोनी ने बताया है कि हटा के १२५ लोगों को विशेष पुलिस अधिकारी बनाया गया था। जिन्होंने १० अप्रैल को भारत बंद को लेकर बरती गई सुरक्षा व्यवस्था में अपनी महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई है। टीआई ने बताया कि १० अप्रैल की पूर्व संध्या में नगर में पैदल मार्च निकाला गया था जिनमें यह भी शामिल थे। खासबात यह है कि इनकी मौजूदगी की वजह से सुरक्षा बल की कमी पूरी हो सकी थी।
यह महिलाएं बनी विशेष पुलिस अधिकारी
हटा नगर निवासी महिलाओं में शामिल गेंदाबाई, मनीषा साहू, याशमीन खान, भारती साहू, मीना साहू, शकुंतला पंडया, रजनी दुबे नपा पार्षद, श्वेता श्रीवास्तव, वर्षा पंडया, अंजना चौबे, उर्मिला दुबे, सुधा दुबे, सविता उपाध्याय, लोकेश्वरी तंतुवाय, प्रीति ठाकुर, प्रीति विश्वकर्मा, पूजा विश्वकर्मा, पूजा कुरेरिया, संगीता चौरसिया सहित अन्य महिलाएं शामिल हैं।
पेंशनर्स ने निभाई जिम्मेदारी
विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में कुछ पेंशनर्स ने भी अपनी महती भूमिका सुरक्षा व्यवस्था के पालन को लेकर निभाई और दिन भर ड्यूटी पर तैनाती दी। इनमें रामशंकर ताम्रकार, बद्री प्रसाद सोनी, हरिनारायण चौरसिया, चक्र सुदर्शन नामदेव, राजेंद्र चौहान, तेजीलाल कारपेंटर, शंकरलाल चौबे शामिल हैं।
सभी का किया गया था जनसंवाद
टीआई हटा प्रदीप सोनी ने बताया है कि विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में सेवाएं लेने के पहले इन सभी के साथ पुलिस जनसंवाद आयोजित हुआ था। जनसंवाद के दौरान आम लोगों से पुलिस के सहयोगी बनने की अपील की गई थी जिस पर इन्होंने अपनी इच्छा जाहिर की थी। पुलिसिंग के रूप में शामिल होने से पहले सभी के स्वास्थ्य के विषय में भी बात की गई थी, इसके बाद इनके नामों की सूची स्वीकृति के लिए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत की गई।
विशेष जिम्मेदारी का अहसास होता है
एसपी विवेक अग्रवाल ने इस मसले पर बताया है कि समाज के प्रति जागरूक लोगो का विशेष मौके पर आवह्न किया गया था, और फिर विशेष पुलिस अधिकारी बनाया गया। पुलिस के साथ कार्य करने के दौरान विशेष जिम्मेदारी का अहसास होता है। इसका लाभ यह हुआ है कि पुलिस और समाज के मध्य विश्वास बढ़ा है। विवेक अग्रवाल ने बताया है कि समाज के प्रति जागरूक लोगों को पुलिस संवाद के जरिए जोड़ा गया था, शांति व्यवस्था के लिए आमजन का सहयोग सर्वोपरि होता है, ऐसे में यह प्रक्रिया सबसे सफलतम मानी जाएगी। आगे भी विशेष मौकों पर विशेष पुलिस अधिकारियों के रूप में समाज के लोगों को पुलिसिंग में शामिल किया जाएगा।
Published on:
12 Apr 2018 12:30 pm

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