
इस वृक्ष को लेडी लेग का नाम दरअसल में अंग्रेजों द्वारा दिया गया था
दमोह/पटेरा. तहसील क्षेत्र अंतर्गत कुलुवा के जंगल में आज भी कुछ ऐसे वृक्षों को देखा जा सकता है जो खुद में विशेष सुंदरता समेटे हुए हैं। इन्हीं में से एक कुल्लू का वृक्ष भी है। संगमरमरी सुंदरता की वजह से इस वृक्ष को लेडी लेग के नाम से भी जाना जाता है। इस वृक्ष को लेडी लेग का नाम दरअसल में अंग्रेजों द्वारा दिया गया था। कहते हैं अंग्रेजों ने यह नाम अपनी गोरी मेमों के तुलनात्मक दृष्टिकोण से दिया था। अंग्रेजों द्वारा दिए गए इस नाम की वजह से जहां ग्रामीण लोग आज भी इसे कुल्लू नामक वृक्ष से ही जानते हैं तो वहीं वनस्पिति विशेषज्ञ इस वृक्ष को लेडी लेग कहते हैं।
तहसील मुख्यालय से सटे सगौनी के जंगल में भी इस वृक्ष की मौजूदगी अभी भी बनी हुई है।
कुल्लू का वृक्ष जितना सुंदर है उतनी ही उसकी उपयोगिता भी है। इस वृक्ष की छाल व गोंद को औषधी के रुप में उपयोग किया जाता है। जानकारों के अनुसार देश विदेश में इसका इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाओं के लिए किया जाता है। बताया जाता है कि यह वृक्ष रात के समय अपनी चमकीली प्रकृति की वजह से सैकड़ों वृक्षों के झुंड में अलग से ही दिखाई दे जाता है।
विलुप्ति की कगार पर
बताया गया है कि कुल्लू का वृक्ष अब जंगलों में धीरे धीरे विलुप्त होता जा रहा है। चांदी जैसे चमकदार तने वाले इस वृक्ष की प्रजाति को समय रहते नहीं बचाया गया तो वह दिन दूर नहीं जब यह वृक्ष जिले के जंगलों से गायब हो जाएगा।
वनांचल के ग्रामीणों ने बताया है कि इस वृक्ष से निकलने वालीं गोंद को निकालने के लिए लोगों द्वारा इन वृक्षों का कत्लेआम बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच सालों के भीतर क्षेत्रीय जंगलों में यह वृक्ष बमुश्किल से नजर आने लगा है। उन्होंने बताया कि कुछ वर्षों पहले स्थानीय जंगलों में इस वृक्ष की संख्या बहुतायत में थी।
फोटो-५०८
Published on:
01 Dec 2018 01:02 pm
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