
वॉक टी थ्री कार्र्यक्रम
दमोह/ मडिय़ादो. एक दसक पहले तक मडिय़ादो के जंगलों मेंं करधई नामक वृक्ष बहुतयात संख्या में हुआ करते थे। लेकिन लगातर इन पेड़ों पर हुआ प्रहार करधई के अस्तित्व पर संकट बना दिया है। अब जंगलों में करधई के पेड़ बहुत कम दिखाई देते हंै। जानकार बताते हैं करधई के पेड़ कांटे जाने के बाद भी वह पुन: तैयार हो जाते हैं, लेकिन इनका सरंक्षण नहीं होता जिसके चलते वह झाडिय़ों में सिमट कर रह गए हैं। यदि इनका सरंक्षण किया जाए तो निश्चित चार पाच वर्ष में पुन: करधई की यह झाडिय़ां वृक्षों में तब्दील हो सकती हंै। इसका उदाहरण मडिय़ादो स्थित गौमुख के जंगल में देखा गया है। यहां एक दसक पहले करधई का जंगल उजाड़ हो चुका था, लेकिन यहां के लोगों की जागरूकता के चलते आज एक बार फिर जंगल के एक बड़े हिस्से में करधई के पेड़ लहलहा रहे हंै।
मुख्य वन सरंक्षक को दिखाई गईं करधई की झाडिय़ां
रविावार वॉक टी थ्री कार्र्यक्रम में मडिय़ादो बफर भ्रमण पर आए मुख्य वन सरंक्षक आर श्रीनिवास मूर्ती को मडिय़ादो बफर अधिकारी एचएच भार्र्गव के द्वारा क्षेत्र के वनों में भ्रमण कराया गया। मूर्ती द्वारा बताया गया यदि दो तीन वर्ष इन झाडिय़ों को सुरक्षा की जाए, तो निश्चित दोबारा यहां करधई पेड़ों के जंगल नजर आने लगेगें। लेकिन जब तक स्थानीय लोग सहयोग नहीं करते तब तक इनहें सुरक्षित करना संभव नहीं है।
सहमें हुए हैं
जिस प्रकार किसी बच्चे को डांटा या मारपीट की जाती है, वह तो सहम जाता है। इसी प्रकार यह पेड़ कांटे जाने के बाद सहमें हुए हैं। जिससे इनकी ग्रोथ नहीं हो रही है, अगर इनको बच्चों की तरह कुछ समय प्यार दिया जाए, इन्हें सुरक्षित रखने लोगों को जागरूक करके नजर आने वालीं करधई की झाडिय़ां कुछ समय बाद वृक्षों का रूप ले सकतीं हैं।
आरश्री निवास मूर्ती ,मुख्य वन सरंक्षक
Published on:
24 Dec 2019 05:04 am
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