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‘लाल गमछा’ डाल हुए नशा से दूर, फिर समूह के साथ नशा के कारोबार को उखाडऩे सड़क पर

10 हजार से अधिक संकल्पित, १८०० से अधिक अवैध शराब के प्रकरण बनवाए, गांव के गांव नशामुक्ति से संकल्पित, फर्जी प्रकरण भी बने, लेकिन पीछे नहीं हटे,अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस विशेष

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दमोह

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Samved Jain

Jun 25, 2023

'लाल गमछाÓ डाल हुए नशा से दूर, फिर समूह के साथ नशा के कारोबार को उखाडऩे सड़क पर

'लाल गमछाÓ डाल हुए नशा से दूर, फिर समूह के साथ नशा के कारोबार को उखाडऩे सड़क पर

दमोह. नशामुक्ति के लिए समाज में ढेरों एनजीओ, सरकारी और निजी संस्थाएं काम कर रही हैं, लेकिन लाल गमछा डाले लोगों का नाम और काम कुछ अलग ही हैं। इनके संकल्प, विचारधारा और कार्य करने के तरीकों ने अवैध रूप से नशे का कारोबार करने वालों की नाक में दम कर रखा हैं। हर दिन इनके समूह कोई न कोई अवैध शराब का प्रकरण थाने में दर्ज कराते हैं।
हम बात कर रहे हैं भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं की। जो पहले तो स्वयं गुरुदीक्षा लेकर नशा, मांस का त्याग करते हैं। फिर संकल्पित होकर समाज से नशा को दूर करने में जुट जाते हैं। ऐसे १० हजार से अधिक लाल गमछा धारी जिले के हर क्षेत्र में देखने मिल जाते हैं। जिनकी मदद से पुलिस ने बीते कुछ वर्षों में १८०० से अधिक अवैध शराब के प्रकरण बनाएं हैं। वहीं शराब की लत से बर्बाद हो चुके गांव आज नशामुक्ति के लिए जाने जाते हैं। खास बात यह है कि नशे के विरुद्ध लड़ रहे इस संगठन के लोगों को कई बार व्यक्ति बुराइयों का भी शिकार होना पड़ा। इनके ऊपर पुलिस थानों में झूठे दर्जनों प्रकरण भी दर्ज कराए गए। हमले किए गए और धमकियां भी मिली, लेकिन नशे के विरुद्ध चल रहा अभियान निरंतर जारी हैं।
- गुरु ने समाज से नशा को दूर का लक्ष्य किया है निर्धारित
दरअसल, योगीराज शक्तिपुत्र महाराज द्वारा स्थापित किए गए इस संगठन का मूल उद्देश्य समाज से नशा, मांसाहार को दूर करना है। साथ ही चरित्रवान जीवन जीने लोगों को प्रेरित करना हैं। वर्षों से चलते आ रहे इस संगठन में हजारों की संख्या में शिष्य जुड़ते चले आ रहे हैं। जो गुरु के दिखाए लक्ष्य के प्रति काम करते चले आते हैं। खास बात यह है कि पहले संगठन कार्यकर्ता स्वयं व्यसनों से दूर होता है, इसके बाद ही समाज को इससे दूर रखने कार्य करता हैं।
- ८ गांवों में नशामुक्ति का हुआ संकल्प
जिलाध्यक्ष डॉ. सुजान सिंह ने अनुसार संगठन अपने लक्ष्यों से कभी पीछे नहीं हटता हैं। जबेरा, दमोह और पटेरा क्षेत्र के ८ गांवों को अब तक पूर्णत: नशामुक्त कराया जा चुका हैं। जहां व्यसन के कारण पूरे के पूरे गांव बर्बादी की ओर अग्रसर थे। अब इन गांवों में शराब का कोई सेवन नहीं करता। बीते तीन सालों में जिले भर में १८०० से अधिक अवैध शराब के प्रकरण संगठन द्वारा बनवाए गए हैं, जिनमें पुलिस ने कार्रवाई की है। इस दौरान हमारे कार्यकर्ताओं के ऊपर झूठे प्रकरण भी बनाए गए हैं, जो भी संगठन की ओर से लड़े जा रहे हैं। इन सब के बीच १० हजार से अधिक युवाओं को नशामुक्ति का संकल्प दिलाकर संगठन से जोडऩे का काम भी किया गया है। जो कदम से कदम मिलाकर काम रहे हैं।
- विवादों के बाद भी नहीं बदला रास्ता
जिले को नशामुक्त करने का लक्ष्य लेकर उतरे संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता अनेक बार विवादों में भी रहे। अवैध शराब पकड़वाने को लेकर कई बार उनके कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप भी लगे। फर्जी प्रकरण दर्ज कराए गए। शराब ठेकेदारों की धमकियां मिलीं। कुछ कार्यकर्ताओं पर हमले भी हुए, इसके बाद भी संगठन के कार्यकर्ताओं ने रास्ता नहीं बदला। संगठन पदाधिकारियों की इस तटस्थता के कारण आज लाल गलछा देख नशा का अवैध कारोबार करने वालों की सांस फूल जाती हैं।

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