
दमोह. जिले में वन विभाग के जंगलों में लकड़ी के अलावा मुरम और पत्थर के अवैध उत्खनन की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। दमोह वन परिक्षेत्र के अलावा तेंदूखेड़ा, हटा, पथरिया, बटियागढ़ और पटेरा क्षेत्र में भी लगातार अवैध तरीके से पत्थर खुदाई के मामले सामने आ रहे हैं। जबकि अधिकांश क्षेत्रों में पत्थर की खदानें तक नहीं हैं। खास बात यह है कि इन पत्थरों को अवैध तरीके से उत्खनन कर पहले तो शासन को राजस्व और खनिज का नुकसान पहुंचाया जाता है। इसके बाद इसी पत्थर को शासन के कार्यों यानि ग्राम पंचायतों में होने वाले खकरी आदि कार्यों में बेचकर शासन से इसकी राशि भी वसूलने का काम किया जा रहा है। इस तरह के मामले लगातार सामने आने के बाद भी वन विभाग कोई बड़ी कार्रवाई जिले में नहीं कर सका है, जिससे लगातार अवैध उत्खनन जारी है।
जिले के हटा वन परिक्षेत्र में भी वृहद स्तर पर पत्थरों का खनन किया जा रहा है। बिना कोई डर के जंगल को खोखला करने का काम किया जा रहा है। फतेहपुर, बरी व सातपुर में इन दिनों बेजा खनन चल रहा है। जहां ग्राम पंचायत में बाउंड्रीवॉल खकरी का निर्माण जंगल के पत्थरों से किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार सुबह 5 से 8 बजे तक पत्थर के अवैध उत्खनन में लगे लोग ट्रैक्टर ट्राली से खनन कर पत्थरों का परिवहन करते हैं। वहीं जंगलों में दिन भर पत्थर तोड़े जाते हैं। जब वीट गार्ड को निर्माण के संबंधी शिकायत की जाती है तो राजस्व का परिक्षेत्र बता कर खुद का पल्ला झाड़ लेते हैं। वन परिक्षेत्र में पत्थर खनन व परिवहन फतेहपुर से लगे जंगलों में आम है।
जंगल से पत्थर की खुदाई से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि ग्राम पंचायत को पत्थर बेचकर शासन को आर्थिक चपत भी लगाई जा रही है। अवैध खनन से निकले पत्थरों को ग्राम पंचायत में सप्लाई किया जा रहा है। इनका टैक्स तक नहीं भरा जा रहा है, इसके साथ ही बेजा उत्खनन से पर्यावरण भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे ही खनन जारी रहा तो आने वाले समय में गंभीर समस्या होना तय है ।
इस संबंध में हटा वन परिक्षेत्र अधिकारी ऋषि तिवारी का कहना है कि अभी बाहर हूं, आकर जांच करके कार्रवाई करता हूं।
Published on:
05 Nov 2024 12:20 pm
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