
सावन में यहां करें नौंवी शताब्दी के शिवलिंग के दर्शन, कहलाते हैं नोहलेश्वर
जबलपुर स्टेट हाइवे पर नोहटा ग्राम स्थित भगवान शिव का एक अनोखा नोहलेश्वर शिव मंदिर बना है। नोहलेश्वर शिव मंदिर का निर्माण नौवीं शताब्दी में होना बताया जाता है। वर्तमान में नोहलेश्वर शिव मंदिर भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। नोहलेश्वर शिव मंदिर नोहटा में विराजित हजारों वर्ष प्राचीन शिवलिंग के दर्शन दूर से होते हैं गर्भगृह में किसी का भी प्रवेश वर्जित है। मंदिर की साफ सफाई पूजन के लिए मात्र मंदिर के गर्भ गृह में पुजारी प्रवेश करते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए गर्भ गृह में जाना शिवलिंग का स्पर्श करना वर्जित है। बावजूद इसके आस्था और शिल्प कला के अद्भुत संगम इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग के दर्शनों के लिए सावन सोमवार को भक्तों की भीड़ लगी रहती है। इस शिव मंदिर में चमिटा चढ़ाने का रिवाज है। यही वजह है मंदिर के द्वार पर दिव्य शिवलिंग रखा हुआ है जिसके पास बहुत सारे चमीटा चढ़े हुए आप देख सकते है।
गांव के लोगों का कहना है कि पूजा के लिए मंदिर का द्वार पर्वों पर खुला रहना चाहिए ताकि गांव और आसपास के लोगों के अलावा दूसरे शहरों से आने वाले लोग पूजा कर सके। वहीं पुरातत्व विभाग मानता है कि ये ऐतिहासिक धरोहर है और इसे संरक्षित रखना जरूरी है। नोहलेश्वर मंदिर का प्राकृतिक सौंद्रर्य व शिल्पकला देखते ही बनती है। अपनी अद्भुत बनावट के लिए प्रसिद्ध मंदिर के अंदर अति प्राचीन शिवलिंग विराजमान हैं। जिनके दर्शनों को लोगों की भीड़ हर समय बनी रहती है।
सावन माह में पर भक्तों द्वारा विशेष रूप से दर्शनों के लिए पहुंचते इस मंदिर की शिल्पकला विश्व प्रसिद्ध खजुराहो मंदिरों जैसी नजर आती है। मंदिर के चारों ओर की नक्काशी देखकर लोग दंग रह जाते हैं। आस्था व शिल्प कला के अदभुत संगम स्थली नोहटा का नोहलेश्वर मंदिर जहां पर अपनी कलाकृर्ति से पुरातन महत्व वाली सैकडों प्रतिमाएं मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई हैं। बताया गया है कि मंदिर करीब एक हजार साल पुराना है।
Published on:
27 Jul 2023 06:37 pm
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