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मप्र के इस तीर्थस्थल पर मिलता है रोजगार, दो सौ घरों के लोग हो चुके हैं सेटल

मध्यप्रदेश में रोजगार के अवसर, मध्यप्रदेश का एक ऐसा तीर्थस्थान जहां मिलता है रोजगार, रोजगार के लिए इस तीर्थस्थल पर करें आवेदन, तीर्थस्थान पर करें काम कमाएं हजारों, प्रसिद्ध तीर्थक्षेत्र कुंडलपुर दमोह में रोजगार के अवसर, तीर्थक्षेत्र कुंडलपुर, जैन तीर्थ कुंडलपुर में रोजगार

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दमोह

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Samved Jain

Jul 31, 2023

मप्र के इस तीर्थस्थल पर मिलता है रोजगार, दो सौ घरों के लोग हो चुके हैं सेटल

मप्र के इस तीर्थस्थल पर मिलता है रोजगार, दो सौ घरों के लोग हो चुके हैं सेटल

मध्यप्रेदश में लगातार बढ़ती बेरोजगारी युवाओं के लिए परेशानी बन रही हैं। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा रोजगार को लेकर विशेष प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जिससे मध्यप्रदेश में २१ से ३५ उम्र और इससे अधिक वाले लाखों युवा आज भी बेरोजगार हैं। ऐसे में एक तीर्थस्थल सामने आया है, जहां रोजगार उपलब्ध हो रहे हैं। यह जैन तीर्थ मध्यप्रदेश के दमोह जिले से है। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के आशीर्वाद और भारत को भारत बनाने के सपने को साकार करते हुए यह रोजगार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इसमें किसी समाज विशेष नहीं, बल्कि बेरोजगारों को रोजगार पहुंचाने का संकल्प नजर आता है। जैन तीर्थ कुंडलुपर में रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

जैन तीर्थ कुण्डलपुर मध्य प्रदेश के दमोह जिले का एक छोटा सा गांव है। कुंडलुपर में अब चंदेरी, महेश्वर और वनारस कि तर्ज पर घर-घर हथकरघा चलाए जाने लगे हैं। कुंडलुपर दमोह में यह सब कुछ संभव हो पाया जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज की दृष्टि से। दरअसल, कुंडलपुर जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान के अत्यंत प्राचीन मंदिर के लिए विश्व विख्यात है यहां पर भारत के कोने.कोने से यात्री आते हैं।

आचार्य श्री के आर्शीवाद से प्रारंभ हुई संस्था श्रमदान में ग्रामीण युवा प्रशिक्षण लेते हैं और थोड़े से अभ्यास के बाद ही ये युवा 400 से 500 रुपए प्रतिदिन का काम करने में सक्षम हो जाते हैं। इनमें से कई युवाओं ने अपनी गृहणियों को भी हथकरघा सिखा दिया है। परिणाम यह हुआ कि उनके घर दूसरा नि:शुल्क हथकरघा भी आ गया। ऐसे कई पति.पत्नियां हैं जो मिलकर 30.40 हजार रुपए हर माह कमा रहे हैं। वास्तव में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए इससे अच्छा मॉडल और नहीं हो सकता। लोगों को अपने गांव में ही रोजगार भी मिल गयाए प्रकृति को हानि भी नहीं पहुंची और हमारी बहुमूल्य प्राचीन कला का संरक्षण भी हो गयाय इसे कहते हैं ष्एक पंथ बहु काजष् आचार्य श्री के सानिध्य में दिया गया था

सौ.वां हथकरघा पिछले महीने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में विराजमान जैन संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के सानिध्य में कुंडलपुर से लगे मढयि़ा टिकैत गांव के नवयुवक महेश बर्मनए मोहराई गांव के रामरतन ढीमरए अशोक नगर से लगे कचनार गांव के कपिल सेन एवं गौरव सेन को हथकरघा दिया गया। आचार्य श्री के सानिध्य में हथकरघा अनुबंध भेंट करते हुए आचार्य श्री ने इन नवयुवकों को समझाते हुए कहा कि अपने आसपास और जो फालतू युवा घूम रहे हैं उनको भी हथकरघा सिखाओ अपने घर की महिलाओं को भी हथकरघा सिखाओ किंतु ध्यान रखना कि कमाया हुआ धन व्यसनों में ना चला जाए उसका सदुपयोग करना। गुरु मुख से यह शिक्षा सुन यह सभी लोग धन्य हो गए। कला बहत्तर पुरुष कीए ता मैं दो सरदार । एक जीव की जीविकाए एक जीव उद्धार ।। ये वचन हैं एक जैन संत के और इनका अर्थ भी आसान है कि कहने को तो इंसान के सीखने के लिए बहुत सारी कलाएं हैं पर उनमें दो ही प्रमुख हैं एक जिससे वह रोज़ी.रोटी कमा सके और दूसरी जिससे वह संसार से मुक्त हो सके। वास्तव में देखा जाए तो आज दुनिया भर की सरकारों के समक्ष यह चुनौती है कि हर हाथ को काम कैसे मिले और इसके लिए वह हजारों करोड रुपए खर्च कर कर भी सभी लोगों को आजीविका के योग्य कौशल नहीं सिखा पा रहे हैं। इस गंभीर समस्या का आसान सा समाधान एक जैन संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के द्वारा दिया गया। उन्होंने कुछ उच्च शिक्षित युवाओं को प्रेरणा दी कि ग्रामीण इलाकों में वसी युवा पीढ़ी को हाथ से कपड़ा बनाने की कला सिखाई जाए। इससे उन्हें अपने घर में ही खेती के साथ एक रोजगार मिल जाएगी।

उनकी रोजगार को सुनिश्चित करने के लिए श्रमदान नामक एक संस्था की स्थापना की गई। इस संस्था में ग्रामीण युवक प्रशिक्षण लेने के लिए आते हैं और कुछ ही महीनों में वे वस्त्र निर्माण कि विविध कलाओं में निपुण हो जाते हैं। और उन्हें घर पर कपड़ा बुनाई करने के लिए एक हथकरघा दे दिया जाता हैए वो भी निरूशुल्कण्ण्ण्ण् 150 करोड़ की आबादी वाले और 6 लाख गांवों वाले हमारे इस भारत की सारी समस्याओं का हल आखिरकार कुटीर उद्योग से ही निकल कर आएगा जिससे किसी ग्रामवासी को रोजी रोटी के लिए शहरों में संघर्ष नहीं करना पड़ेगा और हमारा देश पुन: सोने की चिडयि़ा बन जायेगा