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बुंदेलखंड में राजसी प्यार की याद दिलाते हैं महल व मकबरा

हटा. गरीबी में जब लक्ष्मीप्रसाद मिस्त्री रमा की पत्नी खिलौना बहू ने तेज बुखार के चलते दम तोड़ दिया, तो उन्होंने पत्नी के अंतिम संस्कार के बाद संध्या बेला में पत्नी की याद में कुछ ऐसा करने की ठानी कि वह हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई।

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दमोह

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Hamid Khan

Feb 15, 2025

पति-पत्नी के प्रेम की दास्तां बयां करता है 1921 में बना यह स्मारक

पति-पत्नी के प्रेम की दास्तां बयां करता है 1921 में बना यह स्मारक

पति-पत्नी के प्रेम की दास्तां बयां करता है 1921 में बना यह स्मारक

हटा. गरीबी में जब लक्ष्मीप्रसाद मिस्त्री रमा की पत्नी खिलौना बहू ने तेज बुखार के चलते दम तोड़ दिया, तो उन्होंने पत्नी के अंतिम संस्कार के बाद संध्या बेला में पत्नी की याद में कुछ ऐसा करने की ठानी कि वह हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई।

हटा के मुक्तिधाम में वर्ष 1921 को बनाया गया यह स्मारक पति का पत्नी के प्रति प्रेम दर्शाता है। स्मारक भले ही ताजमहल की शक्ल न लिए हो, लेकिन उसकी स्वर्णिम पृष्ठ भूमि पर ध्यान आकर्षित करने मात्र से ही इसका सौंदर्य महल से कम नहीं लगता। पत्नी की याद में कवि रमा ने स्वयं की तर्जनियां रक्तरंजित कर एक-एक पत्थर तराशकर स्मारक का निर्माण किया था, जो आज भी प्रेम की अविरल गाथा गा रहा है।

पेशे से लडिया निर्माण मिस्त्री रमा स्मारक हटा के श्मशान घाट के पश्चिम दिशा में बनाया है। स्मारक के चारो और हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू संस्कृत पंक्तियां खुद रमा ने छैनी और हथोड़े से उकेरी थी। रमा सहित्यकार भी थे, अपनी कृतियों की दम पर उनकी तत्समय के देश के नामचीन साहित्यकारों से पहचान थी। डॉ. श्याम सुंदर दुबे बताते हैं कि एक बार जब उनकी पहली मुलाक़ात गजानन माधव से हुई थी। जब अपना परिचय देते हुए हटा से बताया तो उन्होंने कहा कि उसी हटा से आए हो जहां के रमाकवि हैं। आसपास के क्षेत्र में उनके बनाए मंदिर और निर्माण के बारे में जानकारी देती उन पर लिखी कविताएं आज भी ज्यों की त्यों है।

हटा क्षेत्र में डॉ. राम कवि जैसी प्रतिभा आलौकिक रही। जिन्होंने अपनी पत्नी के प्रेम में छैनी और हथौड़ा से एक पत्थर का स्मारक बनाया। जिसमें चार भाषाओं में अपनी पत्नी से प्रेम का इजहार किया डॉ. रमा कवि के नाम से हमारे हटा में एक रमा कवि वार्ड भी बनाया गया। हम ऐसे पति-पत्नी के आलौकिक प्रेम समर्पण को शत-शत नमन करते हैं।

स्मारक देखने आते हैं लोग

श्मशानघाट में बना यह प्रेम का प्रतीक 14 फरवरी के दिन युवाओं और दांपत्य जीवन में बंध चुके लोगों में चर्चा का विषय बना रहता है। अपनी पत्नी के प्रति प्रेम समर्पित और खासतौर से प्रेम विवाह करने वाले कई जोड़े आज के दिन इस स्मारक को निहारने जरूर आते हैं। कवि रमा द्वारा पत्नी के प्रति प्रकट किए प्रेम को इस दिन खासतौर पर याद किया जाता है।

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