
Pickle fruit for raw break
यूसुफ पठान मडिय़ादो. वनोपज से मुनाफा की आस रखने वाले आदिवासी परिवार इस वर्ष अचार के दाम शासन द्वारा निर्धारित भाव पर उपज नहीं बेच सकेंगे। क्योंकि निर्धारित दाम उस स्थिती में दिया जाना है। जब उपज की गुणवत्ता ठीक हो, लेकिन इस बार जानकारों की मानें तो उपज पकने के पहले ही तोड़ ली गई। जिससें उसका दाम भी कम मिलेगा।
दरअसल मडिय़ादो के जंगलों में इस साल जमकर अचार में फल आए थे, लेकिन अचार के फलों को पकने के पहले ही आदीवासियों ने तोड़ कर रख लिया। जिस कारण आचार के अंदर चिरौंजी कमजोर रह गई। व्यापारियों के द्वारा बाजार में चिरौंजी के लिए ही आचार फल की गुठली खरीदते हैं। जब गुठली के अंदर चिरांैजी ही कमजोर निकलेगी तो निश्चित भाव पर असर पड़ेगा।
संगठन रहा कमजोर
बीते वर्षों में अचार की गुठली का पकने तक इंतजार किया जाता था, जिसके लिए वन समितियों के सदस्य और गांवों के आदिवासी स्वयं संगठन बना कर जंगलों की रखवाली कर आचार पकने का इंतजार किया करते थे।
लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं हुआ। ब्रजमोहन आदिवासी, गुबंदी आदीवासी का कहना है लोग रात में चोरी छिपे कच्चे आचार तोड़ रहे थे। जंगलों में बड़ी संख्या में आचार गुठली चोरी छिपे उजाड़ कर दी गई। जिसके चलते अन्य लोगों ने चोरो से फसल बचती नहीं देख, अपना नुकसान देखते हुए आचार तोड़ लिया। गुठली कच्ची होने के कारण निश्चित नुकसान हुआ है।
पचास फीसदी भी नहीं है चिरौजी
व्यापारी मदन गुप्ता का कहना है आदिवासियों ने इस साल लालच के चलते अचार गुठली समय से पहले तोड़ ली परिणाम स्वरूप गुठली में 50 फीसदी भी चिरांैजी निकलने की उम्मीद नहीं है। आचार गुठली का परसेंटेज के हिसाब से दाम तय होते है।
ऐसे निकालते है परसेंटेज
व्यापारी अचार गुठली का परसेंटेज निकलाने के लिए उपज में से एक संैकड़ा गुठलियों को पानी से भरे एक बर्तन में डालते हंै और जितने गुठली पानी की सतह में चली जाती है, उस हिसाब से परसेंटेज बना कर भाव तय करते है। व्यापारियों के अलावा शासन के द्वारा भी आचार की खरीद करने के आदेश वन समितियों को दिए गए हंै।
गुठली को समर्थन मूल्य 100 रुपए किलो तय किया है, लेकिन समितियों के द्वारा भी गुणवत्ता पूर्ण उपज लेने की
Published on:
26 Apr 2018 12:56 pm
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