
Protection from cattle and wildlife
दमोह. बुंदेलखंड में खेती करने वाले किसान अपने खेतों की सुरक्षा के लिए तार फैसिंग के बजाए बिजूका के माध्यम से करते हैं। खेतों की सुरक्षा का यह परंपरागत उपाय आज भी खेतों में नजर आ जाता है।
बुंदेलखंड के किसान कहते हैं कि इते बिना बिजूका के खेती नईं होत है, उनका कहना है कि अधिकांश छोटे किसान जो अपने खेतों की तार फैसिंग नहीं करा पाते हैं वह अपने खेतों की सुरक्षा बिजूका टांगकर ही करते हैं। बिजूका को इंसान की शक्ल देने के लिए जुगाड़ का उपयोग किया जाता है। पुराना मटका, पुराने कपड़ा और दो लकडिय़ों के सहारे बिजूका तैयार हो जाता है, जो किसानों को काफी सस्ता भी पड़ता है।
वर्तमान में पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में रबी सीजन की खेती हो रही है। जिले के अधिकांश हिस्सों में गेहूं व चना की फसलें बढऩे लगी हैं। इन बढ़ती फसलों पर खुले में छूटे मवेशियों के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा जिले में बड़ी संख्या में वन्य प्राणियों में हिरण, नीलगाय, जंगली ***** भी बड़ी तादाद में हैं जो खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। मवेशियों, वन्य प्राणियों व पक्षियों से फसलों को सुरक्षा करने के लिए इन दिनों बिजूका लगाए जा रहे हैं।
किसान लुहर्रा के किसान लीलाधर पटेल का कहना है कि दिन रात खेतों की रखवाली नहीं की जा सकती है। इसलिए घासपूस और कपड़ों को पुतले खड़े कर दिए जाते हैं। यह बीजूके फसलों की कई तरह से रक्षा करते हैं। खेत में बिजूका होने के कारण जा मवेशी फसलों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।
किसान रामशंकर लोधी ने बताया कि पिछले कुछ सालों से आवारा मवेशियों का आतंक बढ़ रहा है। अब सैकड़ों की संख्या में मवेशी खेतों को चौपट करते हैं, जिन्हें खेतों से दूर करने के लिए बिजूका ही सहारा है।
हिलता-डुलता बिजूका करता है काम
किसान कीरत यादव ने बताया कि बिजूका बनाना भी एक कला है, बिजूका हवा के साथ हिलता-डुलता रहे, इसलिए ऊपरी हिस्से में वजन रखा जाता है, जिससे थोड़ी सी हवा में वह हिलने लगे। बिजूका देखकर मवेशी व वन्य प्राणी समझते हैं कि खेत में कोई इंसान मौजूद है जो लाठी लेकर उन्हें मारने आ रहा है, जिससे वह बिजूका वाले खेतों में प्रवेश नहीं करते हैं। इसके अलावा रात के समय वन्य प्राणी भी प्रवेश नहीं करते हैं।
Published on:
03 Jan 2020 11:17 am
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