
काला रंग हिंसा और क्रूरता के विचार उत्पन्न करता है
दमोह. सिद्धचक्र सोलह मंडल विधान का शुभारंभ शुक्रवार सुबह घटयात्रा से हुआ। दिगंबर जैन नन्हे मंदिर से घटयात्रा उमा मिस्त्री तलैया परिसर पहुंची। जहां मंडप शुद्धि के साथ विधान के महापात्रों का चयन किया गया।
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि विमल सागर ने कहा कि अनंतानंत सिद्ध परमेष्ठी कि आराधना प्रारंभ हो रही है। अहिंसा के लिए यह कार्यक्रम हो रहा है। गुरुदेव का आशीर्वाद बड़े परिश्रम के बाद मिलता है। गायों की रक्षा करने के लिए यह अनुष्ठान हो रहा है। यहां सिद्धों की आराधना तो करेंगे ही हजारों गायों को अभय दान दिया जाएगा। वैभव, धन चंचल है, चित्त और वित्त दोनों चलायमान है। कीर्ति हमेशा जीवित रहने वाली है। यह कीर्ति भवो-भवो तक चलती है। आप डरो नहीं कि गर्मी है उत्साह के साथ जो कार्य किया जाता है, उसका विशेष फल मिलता है। भामाशाह ने पूरा खजाना राजा को समर्पित कर दिया था।
मुनि भावसागर ने कहा कि यह सिद्ध चक्र विधान ऐतिहासिक होगा प्रभु की भक्ति करने का अवसर पुण्यशाली लोगों को प्राप्त होता है। जो इसमें शामिल नहीं होगा वह पछताएगा तपो में तपने का अवसर प्राप्त हो रहा है। केंद्र में सरकार बन गई अब हमें यहां पात्र चयन करके भगवान के दरबार में सरकार बनाना है। आपको बुद्धिमान बनना है शास्त्रों की विनय करे। शांतिनाथ भगवान के बाद से धर्म अनवरत रूप से चल रहा है। 3 जून को भगवान शांतिनाथ के जन्म, तप, मोक्ष कल्याणक पर विशेष कार्यक्रम होगे। इस बार कुछ नया देखने को मिलेगा।
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Published on:
25 May 2019 03:55 pm
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