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दमोह की बढ़ती आबादी को और चाहिए स्वास्थ्य, सुरक्षा व शिक्षा का अमला

आबादी के घनत्व के हिसाब से रोजगार का है संकट

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दमोह. दमोह जिला जनगणना के हिसाब से काफी घना व संकुचित क्षेत्र माना जाता है, शहरी बसाहट व ग्रामीण बसाहट घनत्व वाले क्षेत्र में ही निवास करती आई है। आवासीय फैलाव न होकर गलियों में एक घर से दूसरा घर लगे हुए क्षेत्रों में लोग निवास करते हैं। अब लगातार आबादी बढ़ रही है तो बसाहट का दायरा भी बढ़ता जा रहा है।
दमोह शहर की आबादी बढ़ती जा रही है, अब आगामी जनगणना में जिले की आबादी में 2 लाख से अधिक वृद्धि की आशंका की जा रहा है। दमोह नगरीय क्षेत्र 39 वार्डों में बंटा हुआ है। जिसका दायरा महज दो किमी के दायरे में फैला हुआ है। अब आबादी बढ़ रही है, संकीर्ण गलियों में बसे दमोह शहर का फैलाव होने लगा है। आबादी के बढ़ते जाने से नगर का विकास पूर्वी दिशा में स्थित पहाडिय़ों व वन क्षेत्र तथा उत्तरी दिशा में रेल लाइन होने के कारण सीमित हो गया है। फलस्वरुप नगर का विकास पश्चिम व दक्षिण, पश्चिम दिशा में अधिक हुआ है। इस दिशा में विस्तार को प्रोत्साहन समतल भूमि होने के कारण मिला है। इसके साथ ही जबलपुर नाका, सागर-कटनी बायपास, बालाकोट व सागर मार्गों पर भी विकास हुआ है। नगर विकास का प्रमुख दबाव जवलपुर मार्ग पर चोपराखुर्द गांव, बालाकोट मार्ग पर लाडऩबाग गांव में हुआ। शहर में कुछ निजी भू-स्वामियों को छोड़कर अधिकांश भू- स्वामियों छोड़कर बिना अनुमति के अवैध कॉलोनियों का विकास हुआ है।आबादी बढऩे के साथ शहर के बाजार और व्यवसाय में भी फैलाव हुआ है।
अब शहर का दायरा 5 किमी में फैला
जनसंख्या में लगातार वृद्धि के साथ शहर का विकास भी हुआ है। अब शहर से बाहर 3 किमी दूरी से कॉलोनियों के साथ ही व्यवसायिक परिसर व बारात हालों का निर्माण भी हो रहा है। दमोह शहर की जनसंख्या के अनुसार नगरीय परिसीमन न होने से शहर की आबादी 1 लाख से अधिक ही बनी हुई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर वह 2 लाख से ऊपर पार कर गई है, नई जनगणना के बाद नया परिसीमन दमोह शहर के संकुचित क्षेत्र को फैलाव देगा।
उपनगरीय क्षेत्र ले रहा आकार
बढ़ती जनसंख्या के साथ संकुचित दायरे में बसे शहर में एक उपनगरीय क्षेत्र भी विकसित हो रहा है। यह उपनगरीय क्षेत्र जबलपुर नाका बायपास से लेकर समन्ना बायपास के बीच विकसित हो रहा है। जिसमें नगर पालिका परिषद की पीएम आवास के साथ ही पॉश कॉलोनी विकसित की जा रही है। वहीं हाऊसिंग बोर्ड ने 800 मकानों की आवास योजना तैयार कर दी है, इसके बाद लगभग 3 हजार से अधिक आवासों के लिए नया प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।
आबादी के हिसाब से रोजगार नहीं बढ़े
दमोह जिले में बढ़ती आबादी के हिसाब से एक जगह सैंकड़ों लोगों को एक साथ काम देने वाली इकाईयों का फैलाव नहीं हो पाया है। जिले में एक मात्र सीमेंट कारखाना है, जिसमें सीमित रोजगार है। रोजगार के जिले में ही दायरा बढ़ाने के लिए खनिज संसाधन व नदियां होने के बाद बड़े कारखानों का विकास नहीं हुआ है।