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रिटायर्ड वन कर्मचारी की मेहनत रंगलाई, समुद्री तटीय क्षेत्रों में उगने वाला नारियल, उत्तर भारत का दशहरी आम आकर्षण का केंद्र

शहर के धरमपुरा क्षेत्र में एक खास बगीचा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यह बगीचा किसी पेशेवर माली ने नहीं, बल्कि वन विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी कुंजबिहारी अवस्थी ने अपने जुनून और समर्पण से तैयार किया है।

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दमोह. शहर के धरमपुरा क्षेत्र में एक खास बगीचा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यह बगीचा किसी पेशेवर माली ने नहीं, बल्कि वन विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी कुंजबिहारी अवस्थी ने अपने जुनून और समर्पण से तैयार किया है। उनकी यह बागवानी न सिर्फ हरियाली का सुंदर उदाहरण है, बल्कि एक प्रेरणादायी कहानी भी बयां करती है।

अवस्थी का गार्डन आज उन फलों से सजा है, जो आमतौर पर दमोह की जलवायु में उगाना संभव नहीं माना जाता। उनके बगीचे में दक्षिण भारत के समुद्री तटीय क्षेत्रों में उगने वाला नारियल, उत्तर भारत में प्रसिद्ध दशहरी आम, और औषधीय गुणों से भरपूर रामफल जैसे दुर्लभ फल मौजूद हैं। इसके अलावा पपीता, केला, जामुन और अमरूद जैसे कई फलदार वृक्ष भी इस बगीचे की शोभा बढ़ा रहे हैं। बता दें कि अवस्थी के गार्डन में लगा रामफल जिले का एकलौता पेड़ है, जो फल दे रहा है।

हर पेड़ की है एक कहानी

कुंजबिहारी अवस्थी बताते हैं कि वन विभाग में अकाउंटेंट की सेवा के दौरान ही उन्हें प्रकृति से लगाव हो गया था। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पूरी तरह बागवानी को समर्पित कर दिया। वर्षों की मेहनत और प्रयोग के बाद उन्होंने यह फलदार बगीचा तैयार किया, जो अब पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुका है।

बगीचा देखने पहुंच रहे लोग

हर दिन आसपास के लोग अवस्थी का गार्डन देखने पहुंचते हैं। यहां की हरियाली, दुर्लभ फलों की विविधता और प्राकृतिक वातावरण लोगों को खासा आकर्षित करता है। कई लोग उनसे बागवानी से जुड़ी सलाह लेने भी आते हैं। कुंजबिहारी अवस्थी का मानना है कि यह बगीचा सिर्फ फल उत्पादन के लिए नहीं है, बल्कि उनका मकसद आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के करीब लाना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है। जरूरी ठिकाना बन गया है।