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नीलगाय का शिकार कर मना रहे थे पार्टी, फिर अचानक यह क्या हो गया

नीलगाय का शिकार कर उसका मांस खाने वाले आरोपी हिरासत में, वन विभाग ने की कार्रवाई

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The party was celebrating Nilgais hunting and then suddenly this happ

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दमोह. बुंदेलखंड में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर मांस खाने की प्रथा अब भी बड़े पैमाने पर देखी जाती है। जिसमें वन्य प्राणियों का मांस यदि मिल जाए तो कहना ही क्या। हालाकि किसी भी वन्य जीव का शिकार करना कानूनन अपराध है और ऐसे आरोपी को सीधे जेल पहुंचाया जाता है। फिर भी लोग जंगल में जो मंगल मनाते हैं वह यह भूल जाते हैं कि वन्य प्राणी का मांस खाने के बाद अब उन्हें ताजिंदगी जेल में ही रहना पड़ेगा।

ताजा मामला दमोह जिले के क्षेत्र से लगे जबेरा थाना के जिलहरी गांव में नीलगाय का शिकार कर उसका मांस खाने वाले तीन आरोपियों को वन विभाग ने गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों से नीलगाय का पकाया हुआ मांस, उपयोग किए गए हथियार, व सींग सहित अन्य सामग्री जब्त की है।
मामले में वन विभाग में पदस्थ एसडीओ महेंद्र कुमार खरे ने बताया है कि तेजगढ़ वन परिक्षेत्र के सर्किल जबेरा की बीट जलहरी में शनिवार सुबह वन्यजीव का शिकार करके घरों में मांस पकाने की जानकारी मिली थी। जिसकी सूचना पर स्टॉफ के साथ जाकर देखा तो तीन आरोपी को वन विभाग की टीम ने छापा मारकर दबोच लिया। वन परिक्षेत्र तेंदूखेडा बीएस भदौरिया ने बताया कि यह कार्रवाई मुखबिरी के आधार पर की गई थी। जिसमें घाना व पटी के ग्रामीणों ने नीलगाय का शिकार कर मांस घरों में पका रहे थे। छापा मारकर तीन ऑरोपियों को नील गाय का मांस पकाते हुए गिरफ्तार किया गया। जिनके कब्जे से मांस बनाने में उपयोग की गई कढ़ाई, पांच किलो मांस नील गाय के दोनों पैर मौके पर बरामद किए गए।
यह हैं तीन आरोपी-
पकड़े गए तीन आरोपियों में घाना निवासी चैना पिता खुब्बी आदिवासी (४०) रूपलाल पिता नारान झारिया निवासी पटी (३२) व कपूरे पिता रामप्रसाद झारिया (६०) के घरों से नील गाय का मांस व मांस पकाने के बर्तन बरामद किए गए हैं। जिसमें नील गाय के दौनो पैर भी ऑरोपियों के घर से बरामद किए।
यह स्टॉफ रहा मौजूद-
नील गाय के शिकारियों को पकडऩे में वन विभाग की टीम में वन परिक्षेत्र तेंदूखेड़ा बीएस भदौरिया, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी जबेरा चंद्र नारायण चौबे, बीट गार्ड जलहरी राजेंद्र चनपुरिया, राकेशकुमार दुबेे उत्तर परिक्षेत्र तेजगढ़, नेक नारायण खरे वनपाल, महेंद्र कुमार खरे बीटगार्ड पटी, दिनेश रैकवार वनपाल बीट पारना सहित वनरक्षक ब्रजेश धुर्वे की अहम भूमिका रही। सभी आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी अपराध 1972 की घाराओं के तहत मामला दर्ज करके विवेचना में लिया गया है। बताया गया है कि अभी इस मामले में अपराधियों की संख्या बढ़ सकती है।