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हौसलों की उड़ान: पहले मास्टर फिर पटवारी अब बन गईं थानेदार

हौसलों की उड़ान: पहले मास्टर फिर पटवारी अब बन गईं थानेदार,ऐसा जुनून की 2 किमी पैदल जाती थीं स्कूूल कॉलेज

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दमोह

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Samved Jain

Oct 31, 2019

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हौसलों की उड़ान: पहले मास्टर फिर पटवारी अब बन गईं थानेदार

दमोह. एक युवती ने पुलिस की नौकरी पाने की लालसा स्कूल शिक्षा के ही दौरान जगा ली थी। यह ललक इतनी तेज थी कि अपने घर से 2 किमी दूर स्कूल फिर कॉलेज पैदल ही गई, कभी साइकिल या स्कूटी का सहारा नहीं लिया। पढ़ाई के बाद शिक्षक बन गईं, इसके बाद पटवारी बन गईं, लेकिन पुलिस में जाने लालसा बनी रही, आखिरकार पुलिस की वर्दी पहनकर ही मानीं।

हम यहां बात कर रहे हैं रनेह थाना प्रभारी सविता रजक की जिनका जीवन और उनके स्वयं के संकल्प हताश व निराश लोगों के जीवन में नई आशा की किरण जगा सकते हैं। मूलत: रहली निवासी सविता का शिक्षाकाल का जीवन संघर्षपूर्ण रहा, पिता की नौकरी चली गई, भाई की तालाब में डूबकर मौत हो गई। अब घर में रह गईं आठ बहनें और मां। दो बहनों की शादी हो चुकी थी, अब सविता को जिम्मेदारी का अहसास हुआ तो उन्होंने सरकारी सेवा में केवल पुलिस की नौकरी करने का दृढ़ संकल्प लिया।

इस संकल्प के लिए उन्होंने स्कूल लाइफ से मन मस्तिष्क में बिठाया और पुलिस की नौकरी करने लायक अपने शरीर को ढालने का प्रयास किया। अध्ययन के दौरान स्कूल व कॉलेज वह पैदल गईं। जहां भी उन्हें जाना होता पैदल ही जाती थीं। पढ़ाई के बाद 2007 में रहली में शिक्षक बन गईं, इसी दौरान पटवारी की परीक्षा का फार्म भर दिया और 2008 में रहली में ही पटवारी के पद पर चयन हो गया। पटवारी की नौकरी करते हुए उन्होंने पुलिस में जाने के प्रयास नहीं छोड़े। उनकी मेहनत और लगन से 2014 में सफलता मिली।

उनका चयन पुलिस महकमें में उपनिरीक्षक पद के लिए किया गया। ट्रेनिंग के बाद पहली पदस्थापना दमोह देहात थाना में हुई है। तबसे जिले के अन्य थानों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इमलिया चौकी में पदस्थ रहते हुए 25 हजार के ईनामी हत्या के आरोपी को पकडऩे में भूमिका निभाई थी, जिस पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर उन्हें सम्मानित भी किया गया था।

जीवन का ध्येय बनाना जरूरी
रनेह थाना प्रभारी सविता रजक अपने जीवन के अनुभवों के आधार पर दूसरों को प्रेरणा देती हैं कि आप जो चाहते हैं उसका सपना संजोए, दृढ़ संकल्प करें और अथक परिश्रम कर तैयारी करें तो एक दिन सफलता जरूर मिलेंगी। समय लगने के कारण कभी-कभी धैर्य टूटने लगता है, लेकिन हमें कहीं न कहीं आशा की किरण नजर आने लगती है और यही सब कुछ सविता के जीवन में भी घटित हुआ है। जिससे वह प्रेरित करती हैं कि अपने लक्ष्य को साध कर हौसलों की उड़ान भरें तो निश्चित ही एक दिन सफलता आपके द्वार पर खड़ी होगी।