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दंतेवाड़ा की बेटी नंदिनी लगातार दूसरी बार युवा संसद में देगी स्पीच, ऐसे पाई सफलता

Nandini Dixit speech: इससे पहले अप्रैल 2022 में नंदिनी ने नई दिल्ली संसद भवन में भी पर्यावरण बचाने के संबंध में संबोधन दिया। यहां उन्होंने सांसदों को प्रत्येक प्रधानमंत्री आवास की छत पर सोलर पैनल लगाने का सुझाव दिया था, जिसे बेहद सराहना मिली थी..

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Nandini Dixit speech: दंतेवाड़ा के बचेली की निवासी नंदिनी दीक्षित इस साल 10-11 फरवरी को नागपुर में होने वाली राष्ट्रीय यूथ एनवायरमेंट पार्लियामेंट में पर्यावरण बचाने के लिए किए जा रहे अपने प्रयास के साथ ही इसके विश्वव्यापी प्रभाव पर चर्चा करेंगी। इससे पहले अप्रैल 2022 में नंदिनी ने नई दिल्ली संसद भवन में भी पर्यावरण बचाने के संबंध में संबोधन दिया। यहां उन्होंने सांसदों को प्रत्येक प्रधानमंत्री आवास की छत पर सोलर पैनल लगाने का सुझाव दिया था, जिसे बेहद सराहना मिली थी।

नंदिनी ने 26 जुलाई 2019 को बचेली में एक पौधा शहीदों के नाम अभियान की शुरुआत की थी। छोटी सी इस शुरुआत ने तीन साल के भीतर उन्होंने दो हजार से अधिक पौधे रोप दिए हैं। इनमें से सात सौ से ज्यादा पौधे पूरी तरह से फल-फूल देने योग्य हो गए हैं। शेष की बढ़वार हो रही है। जिस स्थल पर वे तथा अन्य पर्यावरण प्रेमी यह पौधरोपण कर रहे हैँ, उस जगह को बचेली एनएमडीसी प्रोजेक्ट ने आमोद अरण्य का नाम दिया है। दरअसल यह दिन कारगिल विजय का दिवस है। इस दिवस को यादगार बनाने वे शहीदों की याद में पौधरोपण कर रही हैं।

यूएन क्लाइमेंट चेंज चैलेंज में भी अव्वल
नंदिनी दीक्षित को इससे पहले यूएन क्लाइमेट चेंज अर्थ बीट चैलेंजस, ग्लासगो में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला था। पत्रिका से चर्चा में नंदिनी ने बताया कि इस चैलेंज में उनकी टीम को प्रथम स्थान हासिल हुआ था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीओपी- 26 में हमारे कार्य की स्क्रीनिंग भी हुई थी। इसी साल दिसंबर 2022 में ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित वायु सुमंगलम, प्राजेक्ट में भी नंदिनी को पेपर प्रजेंटेशन इवेंट में भी मुझे भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ था।

कारगिल से लाई गई थी मिट्टी

इस आमोद अरण्य में पर्यावरण प्रेमी प्रत्येक माह के आखिरी सप्ताह 19 से 25 तारीख को जुटते हैँ व एक एक शहीद के नाम से पौधे रोपते हैं। यही नहीं वे अन्य पौधों की देखरेख व उद्यान की साफ सफाई भी करते हैं। खास बात यह है कि इस आमोद अरण्य में कारगिल से लाई गई मिट्टी को भी बिखेरा गया है। यह मिट्टी नंदिनी के माता- पिता सीमा व संदीप दीक्षित ने कारगिल से लेकर आए थे। उनके इस एक पौधा शहीद के नाम अभियान ने देश- विदेश में उन्हें चर्चा का विष बना दिया है।