
12 फरवरी भारत बंद का दिया अल्टीमेटम (photo source- Patrika)
Bharat Bandh: देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले श्रमिक वर्ग के अधिकारों पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2025 में लागू किए गए नए श्रम कानूनों के खिलाफ देशभर में मजदूर संगठनों का आक्रोश अब सड़कों पर उतरने को तैयार है। इसी क्रम में बैलाडीला स्थित एनएमडीसी किरंदुल प्रबंधन को एटक एवं इंटक ट्रेड यूनियनों ने ज्ञापन सौंपते हुए 12 फरवरी को प्रस्तावित भारत बंद का अल्टीमेटम दिया।
ज्ञापन के माध्यम से ट्रेड यूनियनों ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनें 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगी, जिसके तहत भारत बंद किया जाएगा। यूनियनों ने बताया कि यह आंदोलन मजदूरों के अधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय की मांग को लेकर किया जा रहा है। ज्ञापन में ठेका मजदूरों के वर्ष 2024 से लंबित वेतन समझौते को शीघ्र लागू करने, समान काम के लिए समान वेतन, न्यूनतम 26 हजार रुपये मासिक वेतन सुनिश्चित करने, निजीकरण का विरोध तथा श्रमिक हितों की रक्षा जैसे अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।
यूनियनों का कहना है कि यदि इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। एनएमडीसी किरंदुल कॉम्प्लेक्स के एसकेएमएस मजदूर संगठन के महासचिव राजेश ङ्क्षसधु ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार लगातार ऐसे कानून ला रही है, जो मजदूरों को अलग-अलग वर्गों में बांटकर उनके अधिकारों को कमजोर कर रहे हैं। चार श्रम संहिताओं के माध्यम से स्थायी रोजगार, यूनियन बनाने का अधिकार, हड़ताल का अधिकार और सामाजिक सुरक्षा जैसे मूलभूत अधिकारों पर सीधा हमला किया गया है।
उन्होंने मनरेगा का उदाहरण देते हुए कहा कि योजना का नाम बदला गया, कार्यदिवस 100 से बढ़ाकर 125 किए गए, लेकिन भुगतान की जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी गई। अधिकांश राज्य पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं, जिसके कारण मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है और उनका जीवन और अधिक असुरक्षित हो गया है।
Bharat Bandh: ट्रेड यूनियनों का कहना है कि यह केवल आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय भी है। समय पर मजदूरी नहीं मिलने से मजदूर का परिवार, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान सब प्रभावित होता है। ऐसे में ‘‘विकसित भारत’’ का सपना मजदूरों के लिए केवल एक नारा बनकर रह जाता है।
यूनियनों ने स्पष्ट किया कि 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल केवल विरोध नहीं, बल्कि सरकार के लिए चेतावनी है। हालांकि इस दौरान अस्पताल, पेट्रोल पंप और दवा दुकानों जैसी आवश्यक सेवाओं को हड़ताल से अलग रखा जाएगा, जिससे यह संदेश जाता है कि मजदूर आंदोलन पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ रहा है।
ट्रेड यूनियनों ने सरकार से अपील की है कि मजदूरों को बोझ नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता समझा जाए। नीति निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ठेका प्रथा पर नियंत्रण लगाया जाए, न्यूनतम वेतन को सम्मानजनक बनाया जाए और सामाजिक सुरक्षा की ठोस गारंटी दी जाए।
Published on:
22 Jan 2026 01:42 pm
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