20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

समुद्र तल से 3000 फीट की ऊंचाई पर विराजे गंगेश्वर भगवान की जटाओं से निकलती है गंगा, पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

Mahashivratri 2023: दंतेवाड़ा की बैलाडिला पहाड़ियों में समुद्र तल से 3000 फीट की ऊंचाई पर विराजे हैं भगवान गंगेश्वर इनकी जटाओं से गंगा निकलती है। हर वर्ष यहां पर विशाल मेला लगता है। हजारों लोग शामिल होते हैं सभी के लिए खिचड़ी की व्यवस्था की जाती है।

2 min read
Google source verification
Mahashivratri 2023

गंगेश्वर भगवान

Mahashivratri 2023: दंतेवाड़ा की बैलाडिला(BAILADILA) पहाड़ियों में समुद्र तल से 3000 फीट की ऊंचाई पर विराजे हैं भगवान गंगेश्वर इनकी जटाओं से गंगा निकलती है। जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर किरंदुल नगर से होते हुए आप पहाड़ियों में एनएमडीसी(NMDC) की 11बी लौह अयस्क की खदान की तरफ जाएंगे तो रास्ते में भगवान गंगेश्वर जी के दर्शन आपको हो जाएंगे।

यहां हर वर्ष महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2023) के दौरान भव्य मेला लगता है। जिसमें शामिल होने दूरदराज से हजारों लोग पहुंचते हैं। यहां आप ऊपर की ओर जाएंगे तो आपको तपोवन मिलेगा जहां हनुमान जी तप करते हुए मुद्रा में बैठे हैं। आसपास हरी-भरी पहाड़ियां जंगल के बीच शिव जी विराजमान हैं। यहां पर पाताल भैरवी भी है। जहां पहाड़ियों के अंदर से गंगा निकल रही है। जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों की प्यास बुझती है।

यह भी पढ़ें: Mahashivratri 2023: बस्तर में स्थित है हजारों साल पुराना जोड़ा शिवलिंग, पढ़िए इससे जुड़ी मान्यताएं

लोगों का मानना है यहां कोई भी मन्नत बाबा गंगेश्वर(Gangeshwar) से मांगी जाए तो वह पूरी होती है। दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं और संतान, नौकरी अपने बच्चों की शादी के लिए मन्नत मांगते हैं जो पूरी होती है। सावन में यहां से कावड़िया गंगा जल भरकर हर सोमवार को अलग-अलग शिवालय में जल चढ़ाते हैं। यहां के जल को मां गंगा नदी के जैसा पवित्र माना जाता है। क्योंकि यहां 12 महीना पहाड़ियों के अंदर पताल भैरवी से पानी निकलता है। जिसे लोग गंगा मां कहते हैं। इसलिए इस पावन शिवालय का नाम गंगेश्वर पड़ा।

गंगेश्वर (Gangeshwar) के व्यवस्थापक हरू मिस्त्री और सिमैया ने बताया कि हम बयां नहीं कर पा रहे इतनी खुशी है। हर वर्ष यहां पर विशाल मेला लगता है। हजारों लोग शामिल होते हैं सभी के लिए खिचड़ी की व्यवस्था की जाती है। दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने पहुंचते हैं और मन्नत भी मांगते हैं जो पूरी होती है। हमारे समिति के सारे लोग दिन-रात लगे हुए हैं। सारी तैयारी पूरी कर ली गई है।

ग्रामीणा में गंगा प्रकट होने की है मान्यता
यहां के आदिवासियों का कहना है कि एनएमडीसी स्थापना से पहले से ही इन पहाड़ियों की रक्षा देवी देवता कर रहे हैं। 85 वर्ष की बुजुर्ग आयती बाई ने आज से 50 वर्ष पूर्व इस जगह पर नंदराज और पतालभैरवी कि पूजा अर्चना की और छोटा सा मंदिर बना कर पूजा करती रही उनको देवी भी चढ़ती थी। जिसके बाद यहां से गंगा प्रगट हुई और आज इस जल से पूरे क्षेत्र की प्यास बुझ रही है। यहां कें लोगों का मानना है कि जब तक गंगेश्वर जी का आशीर्वाद है तब तक इन पहाड़ियों से गंगा जल निकलता रहेगा और लोगों की प्यास बुझती रहेगी।