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दक्षिण बस्तर के घोटपाल मंडई में 12 के अंक का रहता है विशेष संयोग, जानिए क्या होता है खास

संस्कृति: दक्षिण बस्तर में मेले-मंडई का दौर शुरू, ढोल की थाप पर थिरकते रहे कदम, घोटपाल मेले में दिखा संस्कृतियों का समागम

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दक्षिण बस्तर के घोटपाल मंडई में 12 के अंक का रहता है विशेष संयोग, जानिए क्या होता है खास

दक्षिण बस्तर के घोटपाल मंडई में 12 के अंक का रहता है विशेष संयोग, जानिए क्या होता है खास

दंतेवाड़ा. मंगलवार को गीदम ब्लॉक के घोटपाल में भरे। प्रसिद्ध मेले में अपार जन समूह उमड़ा। परंपरानुसार ग्रामीण अपने.अपने ढोल लेकर मेला स्थल पर थिरकते नजर आए। हर साल उसेंडी देव मंदिर के प्रांगण में आयोजित होने वाले इस मेले में शामिल होने के लिए दूर.दराज के गांवों से ग्रामीण पहुंचे। ढोल वादकों में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल थे। जिनकी स्फूर्ति और लय-ताल गजब की थी। मंगलवार की सुबह श्रृंगार से पहले देवी.देवताओं को पास के तालाब में स्नान कराया गया। देवताओं के प्रतीक को मोरपंख और पारंपरिक आभूषणों से सजाया गया। फिर मन्नत के अनुसार चढ़ावे भी अर्पित किए गए।

12 का खास संयोग
घोटपाल मेला में 12 के अंक का विशेष संयोग रहता है। इस जगह पर देवी-देवताओं के समूह 12 बार मेला स्थल की परिक्रमा करते हैं। जानकारों के मुताबिक पहले यह आयोजन भी 12 दिन तक चलता था। समय के साथ इसे घटाकर दो दिन कर दिया गया।

परिजन मिलने आए उसेंडी देव से
घोटपाल मेला में यहां विराजे उसेंडी तादो देव से मिलने उनके परिजन अलग-अलग इलाके के गांवों से यहां आते हैं। आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य अर्जुन मांझी के मुताबिक उसेंडी देव के परिजन मसेनार, बिंजाम, कुहचेपाल, कोरलापाल, तारलापाल व कटुलनार से हर साल मिलने पहुंचते हैं। उसेंडी देवता के बिंजाम निवासी पुत्र हुंगा, वेल्ला और बोमड़ा देव का आगमन एक दिन पहले सोमवार को होता है, लेकिन रात्रि विश्राम का पड़ाव नजदीकी गांव हीरानार में लगता है।