
जिस शिखर पर हुआ था गणेश व परशुुराम का युद्ध, वहीं गुज्जे देवी के आंगन में आज सजेगा भव्य मेला, जानिए खासियत
दंतेवाड़ा . फरसपाल में भरने वाले विख्यात वार्षिक मेले की शुरूआत रविवार को ढोलकल महोत्सव से हुई। पहली बार ढोलकल महोत्सव का आयोजन जिला प्रशासन व परशुराम करसाड़ समिति की ओर से किया जा रहा है। इस कड़ी में रविवार को ढोलकल शिखर पर विराजे भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद शाम को विधायक देवती कर्मा ने महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। इस बार हाईस्कूल प्रांगण में महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। शुभारंभ के तुरंत बाद जगदलपुर के रास परब सांस्कृतिक संस्था के कलाकारों लोकनृत्यों व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की इस कड़ी में 17 फरवरी की शाम रायगढ़ के कलाकारों का संगीतमय आर्केस्ट्रा इसी मंच पर होगा।
आयोजन को वृहद रूप देने की तैयारी
गुज्जे देवी के आंगन में भरने वाले इस मेला व देवखेलनी के आयोजन को भव्य रूप देने की तैयारी में समिति के सदस्य जुटे हुए हैं। समिति की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक 16 फरवरी को देवी-देवताओं का आगमन व महोत्सव का शुभारंभ हो गया है। 17 फरवरी को भगवान परशुराम जी का पूजन व लोक नृत्य प्रतियोगिता होगी। फरसपाल में कार्यरत युवा गाइड समूह के प्रमुख व स्थानीय युवा हीरालाल कर्मा ने बताया कि मान्यता के मुताबिक ढोलकल शिखर पर भगवान गणेश व परशुराम जी का युद्ध हुआ था। इसी दौरान भगवान परशुराम अस्त्र फरसा फरसपाल गांव के पास गिराए जिससे इस गांव का नाम फरसपाल पड़ा। फरसपाल में भगवान परशुराम की प्राचीन प्रतिमा भी खुले में स्थापित हैए जहां खास मौके पर स्थानीय लोग शीश नवाते हैं।
18 को होगा करसाड़ का आयोजन
18 फरवरी की सुबह 9 बजे देवती-देवताओं का स्नान और इसके बाद करसाड़ का आयोजन होगा। 19 फरवरी को देवी देवताओं की विदाई के साथ ही मेले का समापन होगा। आयोजन के लिए गठित परसुम करसाड़ सह परशुराम ढोलकल महोत्सव समिति में संरक्षक विधायक देवती कर्मा, अर्जुन कर्मा, सुरेश कर्मा, छबिंद्र कर्मा, अध्यक्ष दीपक कर्मा, सचिव अनिल कर्मा सरपंच संयोजक सुलोचना कर्मा जिला पंचायत सदस्य, तूलिका कर्मा जिपं अध्यक्ष, राकेश कर्मा, मंगल मौर्य, प्रमोद कर्मा व संजीव बनाए गए हैं।
स्थानीय युवाओं को मिल रहा रोजगार
ढोलकल शिखर जिले के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर मशहूर होता जा रहा है। इसका फायदा स्थानीय युवाओं को बतौर गाइड काम करने से मिल रहा है। ढोलकल पर्यटक गाइड समूह में करीब 25 युवा कार्यरत हैं, जिनमें से 10 से 12 युवा साल भर इस काम में जुटे रहते हैं। जिससे उन्हें गाइड शुल्क के रूप में अच्छी खासी आमदनी हो रही है। बीते साल वर्ष 2019 में 10 हजार पर्यटक ढोलकल शिखर पहुंचे। जिनसे समूह को गाइड शुल्क, पार्किंग व अन्य सुविधाओं के
एवज में साढ़े तीन लाख रूपए की आमदनी हुई।
तीन साल बाद मूर्त रूप लिया इस महोत्सव ने
वर्ष 2017 में 24 फरवरी को ढोलकल शिखर पर विराजे भगवान गणेश की प्रतिमा गायब हो गई थी। काफी खोजबीन के बाद पता चला कि अज्ञात लोगों ने प्रतिमा को नीचे गिराकर खंडित करने की कोशिश की थी। जिला प्रशासन, पुलिस, पुरातत्व विभाग और स्थानीय लोगों की मेहनत से प्रतिमा के 57 अलग.अलग हिस्से बरामद किए गए। राज्य पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ डॉ प्रभात सिंह व उनकी टीम ने 5 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद प्रतिमा को फिर से उसी स्वरूप में जोडक़र तैयार कर दिया। एक फरवरी 2017 को ढोलकल शिखर पर फिर से गणेशजी की प्रतिमा स्थापित कर दी गई। इस दिन ढोलकल पर्वत पर अपार जनसमूह उमड़ा और पहाड़ के निचले हिस्से में नृत्य व संगीत का कार्यक्रम महोत्सव की तरह चला। इस मौके पर जिला प्रशासन ने हर साल 1 फरवरी को ढोलकल महोत्सव आयोजित करने की घोषणा की थीए लेकिन एक साल भी आयोजन नहीं हो सका। 3 साल बाद इस बार विधायक देवती कर्मा के प्रयास व जिला प्रशासन के सहयोग से ढोलकल सह परशुराम महोत्सव और परसुम करसाड़ का आयोजन किया जा रहा है।
Published on:
17 Feb 2020 04:47 pm
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