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ये है बस्तर की अनोखी परंपरा: महुआ के फूलों के लिए कराई पेड़ों की शादी, तनों में चढ़ाई तेल-हल्दी

Bastar Rituals: छत्तीसगढ़ का बस्तर अपने आप में अनोखा है। यहां के लोग, उनकी संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान अनायास ही सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। यहां के सुन्दर झरने, पर्वत, पहाड़, नदी भी काफी आकर्षक हैं।

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महुआ के फूलों के लिए कराई पेड़ों की शादी

महुआ के फूल

Bastar Rituals: छत्तीसगढ़ का बस्तर(Bastar) अपने आप में अनोखा है। यहां के लोग, उनकी संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान अनायास ही सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। यहां के सुन्दर झरने, पर्वत, पहाड़, नदी भी काफी आकर्षक हैं। ऐसे में यहां आने वाला हर सैलानी मंत्रमुग्ध हो जाता है।

यहां के लोगों की मासूमियत, मेहमानों के आवभगत का तरीका, बातचीत का लहजा और चेहरे की एक निश्छल मुस्कान बाहर से आने वाले लोगों को उनसे मिलने के लिए, बात करने के लिए बाध्य कर देते हैं। यहां आदिवासियों की कई परम्पराएं ऐसी हैं जो आपको सुनने में अटपटी लग सकती है, लेकिन ये कई मायनों में बेहद ख़ास होते हैं। तो चलिए आज हम आपको यहां की एक और ख़ास परंपरा के बारे में बताते हैं।

आपने अच्छी बारिश के लिए मेंढक-मेंढकी की शादी, भीमसेन पत्थर को हिलाने की परंपरा के बारे में तो अवश्य सुना होगा लेकिन क्या आपने प्रमुख वनोपज महुआ फूल की अच्छी पैदावार के लिए पेड़ों की शादी के बारे में कभी सुना है? सुनकर आपको थोड़ा अजीब जरूर लगा होगा लेकिन जी हां, ऐसा होता है बस्तर में। इस परंपरा को लेकर ग्रामीणों की बड़ी आस्था जुड़ी है।


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जानकारी के अनुसार, दंतेवाड़ा जिले (Bastar)के पौराणिक नगरी बारसूर में देवगुड़ी स्थल के पास ग्रामीणों ने महुआ पेड़ की शादी रचाई है। इलाके के सिरहा, गुनिया, बैगा समेत ग्राम प्रमुखों के साथ ग्रामीण एक जगह एकत्रित हुए। उन्होंने महुआ फूल की अच्छी पैदावार के लिए आदिवासी रीति-रिवाज अनुसार महुआ पेड़ का विवाह संपन्न करवाया।

वाद्य यंत्रों की थाप पर थिरके ग्रामीण
यहां के ग्रामीणों ने बताया कि, जिस प्रकार आदिवासी संस्कृति में दूल्हा-दुल्हन को तेल हल्दी चढ़ाई जाती है, ठीक उसी प्रकार महुआ पेड़ के तनों में भी तेल-हल्दी चढ़ाई गई। यहां के ग्रामीण पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर भी थिरके। इस बीच शहनाई भी बजाई गई। यहाँ के ग्रामीण खुद घराती और बराती बने। आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार महुआ के पेड़ों का विवाह संपन्न कराया गया। शादी के बाद ग्रामीण महुआ पेड़ की परिक्रमा लगाकर जमकर थिरके। लोगों ने इस अवसर पर कई तरह के पारंपरिक गीत भी गाए।

सदियों से चली आ रही परंपरा
ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया कि, पेड़ों की शादी की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। महुआ फूल की अच्छी पैदावार के लिए महुआ पेड़ की शादी करवाई गई है। मालूम हो कि बस्तर के ग्रामीण ज्यादातर यहां के वनोपज पर ही निर्भर हैं।