
छत्तीसगढ़ सरकार असम से मंगवा रही है जंगली भैसें, वजह जान हैरान रह जाएंगे आप
धमतरी. इस साल मानसून समाप्त होने के बाद, असम के मानस नेशनल पार्क के निवासी पांच जंगली भैसें (wild buffalo) संभवतः अपने जीवन की सबसे लंबी यात्रा करने करने वाली हैं। उनकी यह यात्रा असम के मानस नेशनल पार्क से शुरू होकर छत्तीसगढ़ के उदंती वन्यजीव अभयारण्य तक की होगी जो लगभग 1,500 किमी है ।
उनकी यह यात्रा कोई साधारण यात्रा नहीं होगी।उनके यात्रा की सफलता पर छत्तीसगढ़ के राज्य पशु का भविष्य निर्भर है क्योंकि छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु जंगली भैंसा विलुप्त होने की कगार पर है।
हालही में हुए गणना के अनुसार उदंती वन्यजीव अभयारण्य (Udanti Wildlife Sanctuary) में केवल 10 जंगली भैंसे बचे हैं। संरक्षणवादियों का कहना है कि उदंती वन्यजीव अभयारण्य में 10 जंगली भैंसों में से आठ पुरुष हैं और महज 2 मादा भैसें है ऐसे में उनके प्रजनन और वृद्धि में समस्या होगी इसीलिए वन्यजीव वैज्ञानिक असम से आने वाली भैसों से उम्मीद जाता रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि मादा जंगली भैंस छत्तीसगढ़ में नर के साथ प्रजनन कर के नर मादा अनुपात को बहाल करेंगी।
भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट के अधिकारी राजेंद्र प्रसाद मिश्रा ने कहा कि "भैसों में नर और मादा की जनसंख्या व्यवहारिक नहीं है और हमें और अधिक मादा भैंसों की जरूरत है। इसलिए हमने देश में सभी जंगली भैसों की आबादी का आनुवंशिक अध्ययन किया गया और उसके आधार पर, हमें पता चला कि मध्य भारतीय और उत्तर पूर्वी जंगली भैंस का आनुवंशिक प्रकृति बाकियों से थोड़ा अलग है।
दो राज्य सरकारों के अलावा, केंद्र सरकार ने भी इस परियोजना को मंजूरी दी है।छत्तीसगढ़ सरकार भी 40 हिरन असम भेजकर इसका बदला चुकायेगी। क्योंकि भैंसों को बाघ के पसंदीदा शिकार में से एक माना जाता है, नेशनल टाइगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी के बिना यह सभव नहीं था और उसने भी इस परियोजना को अपनी अनुमति दे दी है।
जंगली भैंस को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (international union for conservation of nature) ने विलुप्त हो रही प्रजातियों की सूची में शामिल किया है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है की इस काम में बहुत सी बाधाएं है जिसके लिए विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।जंगली भैंस औसतन 2,000 किलो होते हैं ऐसे में उन्हें इतनी दूर ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं है।उनका मानना है जंगली भैसों को गेंडे और हाथियों को ट्रांसपोर्ट करने से भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं यही नहीं आज तक एक वन्य अभ्यारण से दूसरे अभ्यारण तक ऐसे जानवर का स्थानांतरण नहीं किया गया है।
Published on:
09 May 2019 09:03 pm
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