
लालसोट मंडी में एक माह पूर्व लगा मूंगफली का ढेर। फाइल फोटो
दौसा. लालसोट की कृषि उपज मंडी मूंगफली की बंपर आवक के लिए देश विदेश में प्रसिद्ध रही है और हर वर्ष करीब दो माह तक मूंगफली के सीजन के दौरान मंडी में चहल पहल व रौनक बनी रहती थी, लेकिन क्षेत्र में मानसून की बेरुखी ने मूंगफली की फसल पर बड़ा असर डाला है। दो माह तक चलने वाला सीजन इस बार मात्र 20 दिनों में ही निपट गया है। इसके चलते पूरा सीजन फ्लाप हो गया है। अनुमान के मुताबिक अकेले लालसोट मंडी में 50 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार प्रभावित हुआ है, जो कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था व कारोबार के लिए बड़ा झटका भी माना जा रहा है।
गौरतलब है कि लालसोट क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पैदा होने वाली मूंगफली अपनी मिठास व तेलिय मात्रा के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है और विदेशों तक भी निर्यात होता रहा है। मंडी में जब मूंगफली का सीजन पीक पर रहने के दौरान 20 हजार से अधिक बोरी की आवक बनी रहती है। हर वर्ष सितम्बर माह के अंतिम सप्ताह से ही मंडी में मूंगफली की आवक शुरू हो जाती थी, जो कि तीन माह तक बनी रहती थी। इस बार सितम्बर माह के अंतिम सप्ताह में आवक तो शुरू हो गई, लेकिन बारिश नहीं होने व बाद में लट के प्रकोप के चलते अक्टूबर माह पूरा होने से पहले ही सीजन ने दम भी तोड़ दिया।
हर वर्ष पूरे दो माह तक मंडी में 10 से 15 हजार बोरी की नियमित आवक बनी रहती थी, इस दौरान यह आवक 20 हजार का आकड़ा भी छू लेती थी, लेकिन इस बार पूरे दो माह का यह सीजन 20 दिनों में ही निपट गया है। मंडी में फिलहाल मात्र 2 से 3 हजार बोरी की आवक बनी है और मंडी में चहल पहल भी थोड़ी कम ही नजर आ रही है।
50 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित
ग्रेन मर्चेन्ट एसोसिएशन अध्यक्ष नवल झालानी व पूर्व अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल के अनुसार गत वर्ष से इस बार मूंगफली की 50 प्रतिशत पैदावार कम है। इसके चलते 50 करोड़ से अधिक का व्यापार प्रभावित हो गया है। मंडी में प्रति वर्ष 5 लाख बोरी मूंगफली का व्यापार होता है, इस बार यह व्यापार मात्र 2 लाख बोरी तक ही सिमटकर रह गया है, जिससे पूरी मंडी में 50 करोड़ से अधिक व्यापार प्रभावित हो गया है। लालसोट मंडी के कारोबार का असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। मंडी आढतियों का मानना है कि किसान वर्ग अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा बाजार में शादी समारेाह व अन्य कामों में खर्च करता है,जिससे क्षेत्र के पूरे व्यापार को एक बड़ा बूस्टर भी साबित होता है, इस बार जब किसान के यहां उपज ही आधी हुई है और करोड़ों का व्यापार प्रभावित हुआ है तो निश्चित रुप से इसका असर बाजार पर भी देखने का मिलेगा।
क्वालिटी कमजोर रहने से डिमांड भी नहीं
इस बार बारिश की बेरुखी ने किसानों से लेकर आढतियों तक के अरमानों पर पानी फेर दिया है। मंडी आढतियों के अनुसार बारिश नहीं होने से मूंगफली के दाने की क्वालिटी पर गहरा असर पर पड़ा है। गत वर्ष मूंगफली में दाने का औसत 75 से 78 दाने तक था, इस बार यह मात्र 65 से 68 ही रह गया है। दाने की क्वालिटी कमजोर होने से इस बार अन्य प्रदेशों से डिमांड कम रही है। दाना कमजोर होने का असर भाव पर पड़ा है, किसानों को इस बार मंडी को सबसे अधिक दाम 6200 रुपए प्रति क्विटंल के हिसाब से ही दाम मिले है, वर्तमान में तो ये भाव घट कर 5500 रुपए से 5700 रुपए तक रह गए हैं।
एक सप्ताह में मात्र 45 किसानों ने कराया पंजीकरण
इस बार समर्थन मूल्य पर भी मूंगफली बेचने के लिए किसानों का रुझान काफी कम देखा जा रहा है। लालसोट क्रय विक्रय सहकारी समिति के महाप्रबंधक मनुराज मीना ने बताया कि समर्थन मूल्य पर इस बार 6377 रुपए प्रति क्विंटल के दाम से मूंगफली खरीदी जाएगी, जिसके लिए 27 अक्टूबर से ऑनलाइन पंजीकरण का काम शुरू हो चुका है और 18 नवम्बर से तुलाई होगी, अब 45 किसनों ने अपना ऑनलाइन पंजीकरण कराया है।
Published on:
02 Nov 2023 04:18 pm
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