लालसोट उपखण्ड क्षेत्र की कांकरिया ग्राम पंचायत में मोरेल नदी पर बने एशिया के सबसे बड़े कच्चे बांध मोरेल बांध की दोनों नहरों में बुधवार को पानी छोड़ा गया। बांध की पूर्वी नहर व मुख्य नहर से पानी छोडऩे के मौके पर जल संसाधन विभाग के अभियंताओं ने बांध की मोरी के वाॅल्व की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद अभियंताओं ने वाॅल्व की चाबी को घुमाकर नहरों में पानी छोड़़ने की शुरुआत की।
नहरों में पानी का बहाव होता देख ग्रामीणों में किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर भी देखी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में कृषक महिला पुरुष भी मौजूद रहे। नहरों में पानी आता देख नहरों के आस पास बसे गांवों के किसान नहर से पानी अपने खेत तक पहुंचाने के प्रयासों में जुटे दिखाई दिए। नहरों मेें पानी छोड़े जाने के मौके पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बांध की पाल पर मौजूद पीर बाबा की मजार पर पहुंच कर पूजा अर्चना की और मजार पर फूल भी चढा़ए।
नहरों में पानी छोड़े जाने के बाद ग्रामीणों को गुड़ का वितरण करते हुए उनका मुह भी मीठा कराया गया। इस मौके पर जल संसाधन विभाग के अधिशाषी अभियंता एमएल मीना, सहायक अभियंता चेतराम मीना, कनिष्ठ अभियंता अंकित मीना समेत कई जने मौजूद रहे।(नि.प्र.)
एक माह होगी सिंचाई, फिलहाल आठ फीट पानी रिजर्व होगा
विभाग के अधीशाषी अभियंता एमएल मीना ने बताया कि दोनो नहरों से करीब एक माह तक सिंचाई होगी, आठ फीट पानी रिजर्व रहेगा। बांध में फिलहाल 24 फीट 5 इंच गेज पर 1885. 42 एमसीएफटी पानी उपलब्ध है, जिसमें डेड स्टोरेज 211.00 एमएसीएफटी एवं लाइव स्टोरेज 1674. 42 एमसीएफटी पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध रहेेगा। जिससे दोनों नहरों के पूरे कमांड क्षेत्र में 19393 हैक्टेयर भूमि में से लगभग 11104 हैक्टेयर भूमि की सिंचाई होना प्रस्तावित है।(नि.प्र.)
मोरेल बांध की फैक्ट फाइलबांध का निर्माण- सन 1948 में शुरू
बांध का निर्माण कार्य पूरा- सन 1952
कुल भराव क्षमता- 30 फीट 5 इंच
बांध की नहरें- पूर्वी नहर व मुख्य नहर
बांध में पानी का फैलाव- करीब 10 किमी
नहरों की लंबाई:- पूर्वी नहर (31.4 किमी) मुख्य नहर (28 किमी)
कितने जिलों में होगी सिंचाई- दौसा व सवाई माधोपुर
बांध की माइनर नहरें – 29, (पूर्वी नहर माइनर 21.53 किमी) (मुख्य नहर माइनर 76.85 किमी)
कितने क्षेत्र में होगी सिचाई- पूर्व नहर से 6705 हैक्टेयर भूमि, मुख्य नहर से 12 हजार 388 हैक्टेयर भूमि
इन गांवों में होगी सिंचाई:- मुख्य नहर से बौंली व मलारणा डूंगर के 55 गांव और पूर्व नहर से लालसोट व बामनवास के 28 गांवों के खेतों में सिंचाई होगी।