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बांदीकुई की काली मूंगफली का दूर-दूर तक फैला स्वाद

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bandikui kali mungfali

बांदीकुई की काली मूंगफली का दूर-दूर तक फैला स्वाद

बांदीकुई. सर्दियों की ठिठुरन शुरू होने के साथ ही बादाम (काली मूंगफली) ने की मांग बढऩे लगी है। लोग सर्दी मेें मूंगफली को सौगात के रूप में अपने रिश्तेदार-परिचितों के यहां भी भेजने लगे हैं। काली मूंगफली का व्यवसाय मुख्य रुप से अक्टूबर से फरवरी तक चलता है। इन दिनों मंूगफली के व्यापारी ऑर्डर बुक कर सप्लाई देने में लगे हैं।


राÓय में काली मूंगफली की मांग बढऩे से यह कारोबार दिन-प्रतिदिन फलता-फूलता जा रहा है। यहां से जयपुर, भरतपुर, धौलपुर, सीकर, अलवर, अजमेर, टोंक, दिल्ली, रेवाड़ी, हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश तक मूंगफली की सप्लाई हो रही है।
इससे बांदीकुई की पहचान बढ़ती जा रही है।

नमकीन के स्वाद वाली इस मूंगफली को गरीब से लेकर अमीर लोग सर्दी के दिनों में बड़े चाव से खाते हैं। इस व्यवसाय से शहर के तीन दर्जन से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं। ये लोग बाहर से क"ाी मूंगफली (गोड़े) ट्रांसपोर्ट व स्वयं के वाहन से लेकर आते हैं। जहां सालभर का कारोबार छह माह में ही कर मोटा मुनाफा कमा लेते हैं। शाम ढलते ही शहर में गर्म मूंगफली की दुकानों पर सप्लाई होती है। जहां लोगों की मूंगफली खरीदने के लिए भीड़ लग जाती है।


व्यापारी खैराती ने बताया कि चांदपोल एवं सूरजपोल मण्डी से क'ची मूंगफली मंगवाई जाती है। मूगफली (गोड़े) का भाव 80 से 85 रुपए प्रति किलोग्राम है। इस मूंगफली पर 10 से 15 रुपए के हिसाब से सिकाई व अन्य खर्चा आता है। सिकाई के बाद यह काली मूंगफली थोक में 100 रुपए एवं रिटेल में 110 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बाजार में बिक रही है।


उन्होंने बताया कि उनके पिता कल्लू कैप्टन भी मूंगफली का ही कारोबार करते थे और अब वे स्वयं इस व्यवसाय को कर रहे हैं। बाहर के व्यापारी भी कारीगरों को मूंगफली तैयार करने के लिए अ'छी मजदूरी देने का लालच देकर बुलाने का प्रयास भी करते हैं, लेकिन कारीगर व्यवसाय बिगडऩे व पहचान खोने के डर से बाहर जाने में हिचकिचाहट महससू करते हैं। जब स्थानीय स्तर पर ही अ'छा मुनाफा हो जाता है तो फिर बाहर जाने से कोई फायदा नहीं मिलता है। (ए.सं.)

सौंदे नमक से होती है तैयार


मूंगफली के गोड़े (क"ाी मूंगफली ) को शाम को पानी में भिगोकर सुबह सौंदे, सादा नमक एवं मीठा सोडा मिलाकर धूप में सुखा दिया जाता है। इसके बाद भट्टी पर तेज आंच में नमक के साथ सिकाई की जाती है। इसके बाद मूगफली का स्वाद नमकीन हो जाता है। बाजार में कई जगहों पर घरों में ही भट्टियां लगी हुई हैं। इसमें परिवार के सदस्य भी बढ़चढ़कर सहयोग करते हैं। महिलाएं भी मूंगफली सिकाई-सुखाई व पैकिंग में बढ़चढ़कर हिस्सा लेती हैं। एक परिवार एक दिन में 8-10 क्विंटल मूंगफली तैयार कर लेता है। यहां मूंगफली खरीदने के लिए बाहर से भी व्यापारी आने लगे हैं। मूंगफली तैयार करने का कार्य अब ऑर्डर पर भी बुक होने लगा है। Óयादा ऑर्डर आने पर दिनरात भट्टियां तक चलती हैं।

पाचन क्रिया बढ़ाती हैं मूंगफली


वैद्य बलवीरसिंह ने बताया कि काली मूंगफली खाने में स्वादिष्ट लगती है और स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। इसके सेवन से मुंह का जायका तो बदलता है। साथ ही शरीर में गर्मी तक पहुंचती है। मूंगफली की सिकाई करने में सौंदा नमक व सोड़े का उपयोग होने से खाना खाने के बाद पाचन क्रिया में भी सुधार होता है। शाम के समय भोजन करने के बाद लोग अधिकांशत काली मूंगफली खाते हैं।