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Video: कलश यात्रा के साथ भागवत कथा शुरू

मेहंदीपुर बालाजी कस्बे में श्रीमद्भागवत कथा स्थापना से पूर्व कलश यात्रा का आयोजन किया गया।

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मेहंदीपुर बालाजी. कस्बे की चौधरी बालाजी पार्किंग में श्रीमद्भागवत कथा स्थापना से पूर्व कलश यात्रा का आयोजन किया गया। हरिओम शास्त्री ने ध्वज पूजन कराया। यात्रा में 201 महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर चली। कई सजीव झांकियां सजाई गई। कथावाचक पवन शास्त्री ने भागवत श्रवण का महत्व बताया।


प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा: कस्बे की पावन धाम धर्मशाला में शिव पंचायत, राधा-कृष्ण, मां दुर्गा, राम दरबार व हनुमान प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। इससे पूर्व कलश व शोभायात्रा निकाली। इस दौरान धर्मवीर गुप्ता, प्रधान विपिन अग्रवाल, कोषाध्यक्ष अशोक जैन, राकेश गुप्ता, हनुमानपुरी आदि मौजूद थे।

गुढ़लिया-अरनिया. ग्राम पंचायत अरनिया में सोमवार को कलश यात्रा के साथ भागवत कथा शुरू हुई। गोपालजी के मंदिर पर ध्वज व कलश पूजन के साथ कलश यात्रा रवाना हुई। यात्रा में महिलाएं मंगल गीत एवं पुरुष जयघोष लगाते हुए चल रहे थे। पं.सुरेन्द्र शास्त्री ने पहले दिन भागवत कथा के महात्म्य के बारे में बताया। इस मौके पर बनवारीलाल शर्मा, महेश जैमन, सुरेश शर्मा, लल्लूराम शर्मा भी मौजूद थे।

गायत्री यज्ञ में दी सामूहिक आहुतियां


आभानेरी. गायत्री परिवार की ओर से बसंत पंचमी पर सोमवार को हनुमान मंदिर में मां सरस्वती का जन्म दिवस मनाया। पं.श्रीराम शर्मा के आध्यात्मिक प्रज्ञा अवतरण पर पूजा-अर्चना की। सुभाष अवस्थी ने विश्व कल्याण के लिए गायत्री मंत्र व महामृत्युंजय मंत्र का सामूहिक जाप कर यज्ञ में आहुतियां दी। डॉ. राजेश धाकड़ ने युवाओं को गायत्री मंत्र से जुड़ी पुस्तकें वितरित की। लोगों ने घरों में तुलसी के पौधे लगाने की शपथ ली। इस मौके पर देवीसहाय, निरंजनलाल, गंगासहाय, मोतीलाल, केदार, मोहनलाल, रामविलास शर्मा मौजूद थे।

श्रद्धालुओं ने किया जमकर नृत्य


पापड़दा. मिश्रों की ढाणी जोण में आयोजित भागवत कथा में सोमवार को कृष्ण-रुक्मणि विवाह सम्पन्न हर्षोल्लास से हुआ। इसमें श्रद्धालुओं ने वस्त्र, नकदी समेत आभूषण कन्यादान स्वरूप भेंट किए। भजनों की धुनों पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया।

कथा व्यास कृष्ण किंकर सत्यनायणचार्य ने श्रीकृष्ण के बाल रूप माखन चोरी व गोपियों के वस्त्र हरण सहित विभिन्न लीलाओं के बारे में बताया। आयोजक ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कथा के दौरान दही हांडी की व कृष्ण के बाल रूप की सजीव झाकी भी सजाई गई। प्रभुदयाल, रामगोपाल, मदनलाल मोहनलाल, कैलाश, राधेश्याम, लोकेश मिश्रा आदि मौजूद थे।