
दौसा जिला प्रमुख गीता खटाणा की कुछ यूं यादगार रही पहली करवा चौथ
दौसा. विवाहिताओं के लिए बहुत ही खास त्योहार है करवा चौथ। खासकर शादी के बाद की पहली करवा चौथ के यादगार लम्हें ताउम्र जेहन में अमिट छाप छोड़ जाते हैं। कुछ ऐसी ही मीठी याद दौसा जिला प्रमुख गीता खटाणा की हैं। जानिए उनकी ही जुबानी।
बात सन 1987 की है। शादी के बाद पहली करवा चौथ थी। जीआर खटाणा साहब की वाणिÓय कर विभाग में पोस्टिंग रानीवाड़ा में थी। उनको मिटिंग के लिए जयपुर आना-जाना पड़ता था। रानीवाड़ा में भाषा व रहन-सहन यहां से अलग था और मैं किसी को जानती भी नहीं थी। दिनभर घर में ही रहकर टाइम पास करना पड़ता था। जयपुर से मैग्जीन मंगवाकर पढ़ लिया करती थी। करवा चौथ से दो दिन पहले भी वे जयपुर के लिए रवाना हो गए तो मैंने मैग्जीन लाने को बोला था। वे बोलकर गए थे कि करवा चौथ के दिन आ जाएंगे।
अब करवा चौथ आ गई और व्रत भी रखा। एक आंटी से जानकारी कर उनके साथ दिन में पूजा कर खटाणा साहब के आने का इंतजार करने लगी। शाम बीत गई और रात होने लगी, चांद के आने का समय भी होने लगा, लेकिन साहब नहीं आए। भूखे चेहरे पर अब मायूसी आने लगी। इतने में ही उन्होंने आकर सरप्राइज कर दिया तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब मैंने गृहलक्ष्मी मैग्जीन मांगी तो खटाणा साहब ने बड़े प्यार से कहा कि मेरी लक्ष्मी तो तुम ही हो मैग्जीन का क्या करोगी।
उस दौर में यह बात सुनकर मुझे बहुत अ'छा लगा और फिर चांद के अध्र्य देकर उनका चेहरा देखकर व्रत खोला। अब जमाना बदल गया है। अब वे गिफ्ट भी देते हैं। एक बार तो डायमंड रिंग दी। अब बहू के साथ करवा चौथ मनाकर खुशी होती है। जिला प्रमुख होने के नाते दिन में चाहे कितने ही काम हो शाम को समय पर घर पहुंचती ही हूं।
Published on:
27 Oct 2018 08:19 am
बड़ी खबरें
View Allदौसा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
