30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

SC-ST आरक्षण मामले पर गरमाई सियासत, दौसा सांसद मुरारीलाल मीना का बड़ा बयान

सरकार आरक्षण व्यवस्था को विवादास्पद बनाकर समाप्त करना और इन वर्गों को आपस में लड़ाना चाहती है। दौसा सांसद मुरारी लाल मीना के इस बयान के बाद एससी-एसटी आरक्षण मामले पर सियासत गरमा गई है।

less than 1 minute read
Google source verification

दौसा

image

Suman Saurabh

Aug 03, 2024

Dausa MP Murarilal Meena

दौसा। आरक्षित वर्ग एससी-एसटी को कोटे के भीतर कोटा देने और क्रीमीलेयर का आरक्षण समाप्त करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शनिवार को दौसा सांसद मुरारीलाल मीना ने पत्रकार वार्ता में केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। मुरारीलाल ने कहा कि फैसले से लगता है कि सरकार ने सही पैरवी नहीं कर लापरवाही बरती है। एससी-एसटी का आरक्षण भारतीय संविधान में आर्थिक और पिछड़ेपन के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक, आदिम निवास परम्पराओं और सामाजिक स्थिति के आधार पर दिया गया है।

सांसद ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने संविधान में जिस प्रकार एससी-एसटी को आरक्षण का प्रावधान किया था, उसके हिसाब से यह फैसला संविधान विरोधी प्रतीत होता है। सरकार आरक्षण व्यवस्था को विवादास्पद बनाकर समाप्त करना और इन वर्गों को आपस में लड़ाना चाहती है। उन्होंने कहा कि फैसले से एससी-एसटी वर्ग सहमत नहीं है, सरकार को पुनर्विचार के लिए अपील करनी चाहिए।

सामाजिक जनगणना कराएं

सांसद मुरारीलाल ने कहा कि सरकार पहले एससी-एसटी की आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक जनगणना करवाए, जिससे उनकी वास्तविक स्थिति का पता चल सके। वर्तमान में उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में एससी-एसटी की हिस्सेदारी मात्र 3 प्रतिशत है, जबकि देश में जनसंख्या 25 प्रतिशत है। वर्गीकरण से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए था कि न्यायिक सेवा में इनकी अनुपातिक हिस्सेदारी बढ़े और जो पद खाली है उन्हें तुरंत भरा जाए।

यह भी पढ़ें : Rajasthan BJP: ‘ये बहुत मुश्किल काम… इसमें कई लोग हुए फेल’ मदन राठौड़ के पदभार ग्रहण समारोह में बोलीं वसुंधरा राजे

Story Loader