
दौसा. श्यालावास केन्द्रीय जेल में बंद बंदी ने किया साढ़े 7 लाख रुपए का गबन
दौसा/पापड़दा. दौसा जिले की श्यालावास केन्द्रीय जेल में बंद एक बंदी ने जेल में रहकर जेल के रिकॉर्ड में गबड़बडी कर बंदियों की मजदूरी की राशि के साथ गबन कर डाला। जिसकी राशि का भुगतान अब जेल के अधिकारियों को करना पड़ रहा है।
केन्द्रीय कारगार श्यालावास में हत्या के आरोप में बंद एक बंदी को बिना आदेश के ही कम्प्यूटर पर जेल में बंदियों की मजदूरी की राशि का रिकॉर्ड संधारण का काम सौंप दिया। जिसने अपने 10 मित्रों व रिश्तेदारों के बैंक खातों में 7 लाख 42 हजार रुपए का भुगतान करा दिया। बंदी द्वारा कम्प्यूटर पर संधारण किए की गई राशि के बिल भी अधिकारियों ने पास कर दिए और राशि जेल से बाहर रह रहे बंदी के रिश्तेदार व मित्रों के बैंक खातों में भी पहुंच गई। पता चलने पर आनन - फानन में जेल प्रशासन की ओर से बंदी के खिलाफ पापड़दा पुलिस थाने में मामला भी दर्ज करा दिया गया है। हालांकि यह इस राशि का बिल पास करने वाले कर्मचारी व अधिकारी इस राशि को कोई नकद तो कोई तनख्वा में से जमा भी करा रहा है।
बिल प्रमाणित करने वालों को करानी पड़ रही है राशि जमा
थाना प्रभारी ने बताया कि श्यालावास जेल में जिन कारापालों व उपकारपाल ने बंदियों की मजदूरी के बिलों को प्रमाणित किया, अब उनसे गलत खातों में गई यह राशि जमा कराने का आदेश दिया गया। इसमें आदेश की पालना में कारापाल मुंशीराम मीना व उप कारापाल कालूराम मीना ने अपने द्वारा प्रमाणित राशि को 30 सितम्बर 2022 को कोष में जमा करा दी। जबकि कारापाल अमरङ्क्षसह की तनख्वाह से 1 लाख 30 हजार 554 रुपए की राशि प्रति माह 21 हजार 520 रुपए के हिसाब से काटी जा रही है।
यह है मामला
पापड़दा थाना प्रभारी मुरारीलाल मीना ने बताया कि कार्यालय अधीक्षक अभिषेक शर्मा केन्द्रीय काराग्रह श्यालावास ने मामला दर्ज कराया कि जयपुर के विराट नगर तहसील के श्यामपुरा निवासी पूरणमल मीना पुत्र अशोक कुमार मीना हत्या के आरोप में जयपुर जेल में बंद था। जिसको श्यालावास जेल में 21 मार्च 2020 को लाया गया था। इस बंदी को जेल सेवा में मदद के लिए कारापाल कार्यालय में साफ- सफाई के लिए लगाया गया था, यह बंदी कम्प्यूटर का काम भी जानता था। कारापाल कार्यालय की कम्प्यूटर शाखा में जेल में बंद बंदियों की मजदूरी के भुगतान के आदेश बनाए जाते हैं। हालांकि इस कार्य में बंदी को लगाने का कोई आदेश नहीं था, लेकिन उससे काम करवा लिया जाता था।
यह बंदी एक वर्ष तक इस काम में मदद कर रहा था। ऐसे में इस बंदी को जेल में बंद बंदियों के मजदूरी के भुगतान बनाने का पूरा ज्ञान हो गया। उसने जेल में सही बंदियों के मजदूरी भुगतान आदेश के साथ -साथ अपने मित्रों व रिश्तेदारों के नाम भी जोड़ दिए और उनके बैंक खाता संख्या भी जोड़ दिए। यह जानकारी जेल में लगी एसटीडी कॉल की रिकॉर्डिंग से मिली है। बंदी का पूरा विश्वास होने पर कारापाल मुंशीराम मीना ने 5 लाख 24 हजार 200 रुपए बिल भुगतान के आदेश व कारापाल अमर ङ्क्षसह नरूका ने 1 लाख 30 हजार 554 रुपए व उपकारापाल कालूरा मीना ने 88 हजार 199 रुपए के बिलों को प्रमाणित कर दिया। ऐसे में बंदियों की सही मजदूरी के बिलों के साथ ही गलत बिलों की राशि का भुगतान भी हो गया। थाना प्रभारी ने बताया कि जेल प्रशासन ने बंदी से जब गहनता से पूछताछ की तो यह राशि जमा कराने के लिए कह दिया, लेकिन 29 सितम्बर 2022 को उसने राशि जमा करवाने से मना कर दिया। जिन लोगों के बैंक खातों में यह राशि डाली थी, उनसे भी सम्पर्क किया गया।
मामला बड़ा, जांच चल रही है
केन्द्रीय काराग्रह श्यालावास के अधीक्षक ने यह मामला दर्ज कराया है। मामला बड़ा है, एक बंदी ने जेल में गबन कर दिया। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर मामले की गहनता से जांच चल रही है।
मुरारीलाल मीना, थाना प्रभारी पापड़दा।
जांच का विषय है, जो भी दोषी होगा कार्रवाई होगी
बंदियों की मजदूरी भुगतान में अनियमितता की रिपोर्ट पापड़दा थाने में दर्ज करा दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है, जो भी दोषी पाया जाएगा,उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी
अभिषेक शर्मा तत्कालीन अधीक्षक केंद्रीय कारागृह शयालावास दोसा
Published on:
14 Oct 2022 02:59 pm
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