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दौसा. राइट टू हेल्थ: चिकित्सा मंत्री के गृह जिले में हड़ताल का नहीं दिखा खास असर

सीएमएचओ का दावा, 325 में से 270 चिकित्सक रहे उपस्थित

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दौसा. चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीना के गृह जिला दौसा में बुधवार को प्रदेशव्यापी सरकारी चिकित्सकों की हड़ताल का असर नाममात्र का ही दिखा। सुबह कुछ देर अस्पतालों में काम करने को लेकर चिकित्सकों में ऊहापोह की स्थिति रही, लेकिन धीरे-धीरे चिकित्सकों ने कार्य करना शुरू कर दिया। दौसा जिला अस्पताल में तो हड़ताल का असर कतई नजर नहीं आया। वहीं जिले के अन्य स्वास्थ्य केन्द्रों में कुछ देर स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रही। सीमएचओ के अनुसार जिले में 325 में से 270 चिकित्सकों ने काम किया। मात्र 55 चिकित्सक अवकाश पर रहे।
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य का अधिकार बिल के विरोध में आंदोलन कर रहे निजी चिकित्सकों के समर्थन में बुधवार को सरकारी चिकित्सकों का प्रदेशव्यापारी हड़ताल का ऐलान किया गया था। इसे देखते हुए प्रशासन ने वैकल्पिक इंतजाम भी किए। जिला अस्पताल सहित स्वास्थ्य केन्द्रों में आयुष चिकित्सक लगाए गए। जिले के सबसे बड़े रामकरण जोशी जिला अस्पताल में सुबह चिकित्सक पहुंचे और मरीजों को इलाज भी करते नजर आए। हालांकि शुरुआत में कुछ देर डॉक्टर हड़ताल को लेकर पशोपेश में रहे, लेकिन फिर एक के बाद एक ने काम करना शुरू कर दिया। हालांकि अन्य दिनों की तुलना में अस्पताल में मरीजों की संख्या कम रही। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवराम मीणा ने बताया कि सभी चिकित्सकों ने निर्धारित शेड्यूल के अनुसार कार्य किया है।
निजी चिकित्सकों ने बलिदान दिवस मनाया: नेहरू गार्डन में बुधवार सुबह प्राइवेट हॉस्पिटल्स एसोसिएशन की ओर से डॉ. अर्चना शर्मा की पुण्यतिथि को बलिदान दिवस के रुप में मनाया गया। जिलाध्यक्ष डॉ. दिनेश पारीक ने बताया कि चिकित्सकों के अलावा अन्य संगठनों के पदाधिकारियों ने पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। वहीं निजी अस्पतालों की हड़ताल भी जारी रही।
अध्यक्ष व महासचिव ने इस्तीफा दिया: अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ दौसा के जिलाध्यक्ष डॉ. कपिलदेव मीना व महासचिव डॉ. राजेश गुर्जर ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। हालांकि वे इस्तीफे का कारण निजी बता रहे हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार सीनियर चिकित्सकों द्वारा संगठन की बुधवार को हड़ताल रखने की बात नहीं मानने से खफा होकर पदाधिकारियों ने त्यागपत्र दिया है।
बांदीकुई. राइट टू हैल्थ बिल के विरोध में जहां निजी अस्पताल बंद चल रहे हैं, वहीं बुधवार को उनके समर्थन में उपजिला अस्पताल के करीब 17 चिकित्सक हड़ताल पर रहे। इसके चलते मरीज उपजिला अस्पताल में इधर उधर भटकते नजर आए। चिकित्सा प्रशासन की ओर से हड़ताल के बीच दो आयुष डाक्टरों को जिम्मेदारी सौंपी। उपजिला अस्पताल में ओपीडी 600 रही। उधर मरीजों व तामीरदारों का कहना है कि निजी अस्पताल पहले से ही बंद चल रहे हैं और अब सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार के चलते मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे में मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही हैं।
महुवा. यहां उपखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की हड़ताल का कोई असर दिखाई नहीं दिया। अस्पताल में चिकित्सकों ने ओपीडी में मरीजों की जांच की गई तथा उन्हें दवाइयां भी दी गई। हालांकि हड़ताल की सूचना के चलते अस्पताल में आम दिनों की अपेक्षा मरीज की संख्या बहुत ही कम देखने को मिली। जहां ओपीडी अन्य दिनों की अपेक्षा आधी रही। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि महुवा सामुदायिक अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा ओपीडी में मरीजों को देखा गया है। बुधवार को ओपीडी में 350 से अधिक मरीजों को देखा गया।