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सख्ती के बावजूद नहीं माने लोग, पुलिस की सख्ती का नहीं असर

- पुलिस-प्रशासन की रणनीति नहीं रही कारगर

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दौसा

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Mahesh Jain

May 31, 2021

सख्ती के बावजूद नहीं माने लोग, पुलिस की सख्ती का नहीं असर

सख्ती के बावजूद नहीं माने लोग, पुलिस की सख्ती का नहीं असर

दौसा. कोरोना वायरस संक्रमण की चेन तोडऩे के लिए लागू पूर्ण कफ्र्यू के तीसरे दिन सोमवार को ग्रामीण कस्बों ही नहीं शहरों में भी गाइड लाइन की पालना होती नजर नहीं आई। जिले में कई जगह सोशल डिस्टेंस की पालना नहीं हो रही थी तो कहीं पर लोग बिना मास्क घूमते दिखे। कफ्र्यू के बावजूद लोग नहीं माने और सुबह के वक्त सड़कों पर घूमते दिखे। पुलिस की रणनीति कारगर साबित नहीं हो रही है। पुलिस टीम के एक साथ कस्बे का दौरा करने से दूसरी तरफ धड़ल्ले से नियमों का उल्लंघन किया जाता है। ऐसे में यदि ढिलाई चलती रही तो हालात फिर से बेकाबू हो सकते हैं।


पुलिस की नाक के नीचे ही गड़बड़ी

जिला मुख्यालय पर गांधी तिराहे के 20 मीटर की दूरी पर एक जगह फूलों की बिक्री होती रही। वहीं आसपास भी इक्का-दुक्की दुकानें खुली थी। यहां तक की जिले के अधिकारियों के परिजन भी कार लेकर सुबह लालसोट रोड स्थित एक दुकान से सामान खरीदकर ले जाते दिखे। मोबाइल की दुकानों के आगे व्यापारी बैठ कर मोबाइल खरीदने वालों को हाथों का इशारा कर बुला रहे थे। गांधी तिराहे सहित पुलिस के अधिकतर प्वाइंटों के इर्द-गिर्द शराब की दुकानों के शटरों के नीचे से दिनभर मदिरा विक्रय होती रही। वहीं शहर की गलियों में भी सुबह-शाम दुकानों से व्यवसाय किया गया।


फेरी नहीं लगाकर एक जगह खड़े रहे ठेले

शहर के लालसोट रोड स्थित सब्जी मण्डी के आगे करीब पचास ठेले वाले सुबह 6 से 10 बजे तक आराम से फल बेचते नजर आए। यहां पर सोशल डिस्टेंस की सरेआम धज्जियां उड़ रही थी। एक-एक ठेले पर कहीं आठ तो कहीं दस जने फल खरीद रहे थे। सब्जी मण्डी में भी धड़़ल्ले से सब्जी बेची जा रही थी। इसी प्रकार सोमनाथ चौराहे पर लगी सब्जी मण्डी के हाल थे।

कस्बों में रोक-टोक नहीं

ग्रामीण कस्बों के हालात और भी बिगड़े हुए हैं। कस्बों में सुबह 6 से 11 बजे तक पूरे बाजार खुले हैं। दुकानों पर आम दिनों की तरह ग्राहकों की भीड़ नजर आई। पूरे लॉकडाउन में एक भी दिन ऐसा नहीं निकला जिस दिन बाजारों में दुकानें बंद रही। इससे प्रशासन की कमजोरी उजागर हो रही है। स्थानीय उपखण्ड प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी एक-दो बार ही राउण्ड पर आए हैं। थाना प्रभारी भी पुलिसकर्मियों की जगह होमगार्ड के जवानों को भेज कर काम चला रहे हैं। होमगार्ड के जवान भी एक ही सुरक्षित स्थान पर बैठ कर आकर अपनी ड्यटी पूरी कर शाम पांच बजे घरों के लिए रवाना हो जाते हैं।