
दौसा. जिले में पांच दिवसीय दीपोत्सव को लेकर बाजारों में भीड़ होने लगी है। लोगों ने खरीदारी तेज कर दी है। इससे जिले में दीपावली का बूम दिखाई देने लगा है। रेडीमेड गारमेंट्स, साड़ी व टेलरों की दुकान पर ग्राहकों का तांता लगा रहता है। कपड़ों में फैशन हावी है।
युवाओं व युवतियों में फिल्मी कलाकारों की तरह कपड़े खरीदने की चाह है। वहीं महिलाएं भी टीवी सीरियल्स की कलाकारों की तरह साड़ी ले रही हैं। लोग समय रहते ही कपड़ों की सिलाई व खरीदारी से मुक्त होना चाहते हैं। दिन-प्रतिदिन बदलती फैशन व कपड़ों के डिजाइन के दौर में बने रहने के लिए अब टेलरों ने भी सिलाई का तरीका बदल दिया है। जिले के टेलर वर्तमान फैशन, रेडीमेड कपड़ों की डिजायन व ग्राहक की मांग के अनुसार ही कपड़े सिलने लगे हैं। इससे टेलरों के पास भी काम बढ़ गया है।
बढ़ते काम के दबाव व समय की बचत के लिए लोगों का रुझान रेडीमेड गारमेंट्स की ओर भी है। ऐसे में दुकानों पर विभिन्न ब्रांड्स व डिजाइनों के कपड़े उपलब्ध है। व्यापारी वर्ग लोगों को खुश करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। व्यवसायी बसंत सर्राफ ने बताया कि शिफॉन, फैंसी, चंदेरी, रो सिल्क आदि वैरायटी की साडिय़ां महिलाओं को पसंद आ रही है।
रेडिमेड की ओर बढ़ते कदम
रेडिमेड गारमेंट्स व्यापारियों का मानना है कि वर्तमान में लोगों को तैयार कपड़ों की ओर रूझान ज्यादा है। ऐसे में उन्हें भी विभिन्न डिजायन के कपड़े लाने पड़ते हैं। व्यापारी हितेश शाहरा, अटल गुप्ता, रजत खूंटेटा, नमन रावत, दीपक चौकड़ायत, असलम खान आदि ने बताया कि लोगों में फिल्मी अदाकारों के पहने हुए जैसे कपड़े खरीदने का शौक है। एक से एक डिजायन के कपड़े होने के कारण लोगों में रेडिमेड कपड़े खरीदने का चलन बढ़ा है। युवाओं को जींस व शर्ट भा रही है।
सिलाए कपड़ों का नहीं विकल्प
अध्यापक अवधेश तिवाड़ी ने बताया कि भले ही रेडीमेड गारमेंट्स का चलन बढ़ गया हो, लेकिन वे कपड़े आरामदायक नहीं होते हैं। टेलरों से सिलवाए गए कपड़ों में फिटिंग बहुत अच्छी होती है। उनके पहनने के बाद शरीर को आराम मिलता है। युवा नीरज गौतम ने बताया कि वर्तमान में युवा भागदौड़ भरी जिंदगी में रेडिमेड की ओर भाग रहे हैं, लेकिन सिलाए हुए कपड़ों की बात ही कुछ और है।
व्यापारियों को नहीं फुर्सत
दीपावली की बूम के चलते बाजार में व्यापारियों को दिनभर फुर्सत नहीं मिल रही है। टेलर जुबेर खान ने बताया कि कपड़े सिलवाने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। कारीगरों को दिन-रात काम पर लगाया है। वर्तमान में बाजार में 350 से 650 रुपए एक जोड़ी कपड़े की सिलाई ली जा रही है।
Published on:
15 Oct 2017 08:03 am
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