दौसा. बांदीकुई. राइट टू हैल्थ बिल के मामले को लेकर निजी नर्सिंग होमों में गत 10 दिन से उपचार बंद है। जिसके चलते प्राइवेट हॉस्पिटलों में सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं सरकारी चिकित्सालयों में दो घंटे का कार्य का बहिष्कार होने से मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड रहा है। नियत समय पर ईलाज नहीं मिलने से अब मरीजों का रूझान झोलछापों की ओर होने लगा है। इससे सरकारी चिकित्सालयों का आउटडोर भी घटने लगा है। जहां चिकित्सालय का आउटडोर पहले 1000 से डेढ हजार मरीज प्रतिदिन पहुंच गया। उसमें अब हडताल के चलते कमी आने लगी है।
चिकित्सालय से मिले आंकडों के मुताबिक 19 मार्च को 455 मरीज, 20 को 1222, 21 मार्च को 1122 , 22 को 1092, 23 को 666, 25 को 695 एवं 26 मार्च को 439 , 27 मार्च को 662 का आउटडोर रहा। आउटडोर कम होने का कारण कार्य का बहिष्कार होना माना जा रहा है। इसके चलते मरीज अब झोलाछापों से ईलाज कराने लगे हैं। जिससे झोलाछाप चिकित्सकों की पौबारह होने लगे है। वहीं खांसी जुकाम के मरीज दवा विक्रेताओं से भी दवा खरीदखर उपचार स्वयं के स्तर पर लेने लगे हैं। निजि चिकित्सक हडताल पर होने से मरीजों की जांच नहीं हो रही हैं। लोगों को चिरंजीवी योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा है। सरकारी चिकित्सालयों में डिलेवरी की संख्या भी बढ गई है। जिससे महिला वार्ड पलंगों से भरे हुए हैं। सरकार प्राइवेट मेडिकल एसोसिएशन से बात कर रास्ता निकालने का प्रयास करे, जिससे मरीजों को उपचार में राहत मिल सके।
