चुनाव आयोग ने 80 साल से अधिक आयु के अक्षम लोगों को होम वोटिंग का अधिकार दिया। दौसा जिले में भी होम वोटिंग हुई लेकिन इसके दायरे में करीब 1800 ही वोटर आ पाए। बीएलओ के सर्वे में वे लोग नहीं आए जो 25 नवंबर को बमुश्किल वोट देने बूथों तक पहुंचे। कुछ लोगों को तो पता ही नहीं था कि होम वोटिंग का भी अधिकार दिया गया है। ऐसे में प्रचार-प्रसार की कमी मानी जा रही है। साथ ही सर्वे के दायरे में भी ऐसे लोग नहीं आ पाए।
लालसोट रोड दौसा निवासी रामगोपाल शर्मा आनंद शर्मा राजकीय बालिका स्कूल केन्द्र में वोट डालने पहुंचे थे। उम्र 90 साल है और व्हीलचेयर पर आए थे। उनके परिजनों ने बताया कि होम वोटिंग में रजिस्टे्रशन कराने के बाद भी घर से मतदान की सुविधा से वंचित कर दिया गया। इसके बावजूद वे परिजनों की सहायता से वोट डालने पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि दबाव में कई लोगों का नाम होम वोटिंग में शामिल नहीं किया
इसी तरह नेहरू गार्डन के सामने रहने वाले 93 वर्षीय गोवर्धन बढ़ेरा ने भी रामकरण जोशी स्कूल बूथ पर परिजनों की सहायता से पहुंचकर मतदान किया। बढ़ेरा को भी होम वोटिंग की सुविधा नहीं मिली, जबकि 1 अक्टूबर को अन्तरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर स्वीप टीम ने उनके घर पहुंचकर सम्मान भी किया था। उनके पुत्र सुनील बढ़ेरा ने बताया कि होम वोटिंग के लिए आवेदन करने के बावजूद सुविधा नहीं दी गई।
इसी तरह जिले के अधिकतर बूथ पर 8 से 10 बुजुर्ग व अक्षम पहुंचे थे। सूत्र बताते हैं कि बीएलओ की सूचना के बावजूद होम वोटिंग में ज्यादा नाम नहीं जोड़े गए हैं।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने प्रदेश में 14 से 19 नवंबर तक होम वोटिंग की सुविधा दी थी। जिले में 16 से 18 तक होम वोटिंग कराई गई। खानापूर्ति के चलते अक्षम लोगों को बूथ तक कड़ी मशक्कत के बाद पहुंचना पड़ा। तमाम वोटर घरों से अक्षमता के कारण निकले नहीं। यदि इन सभी को होम वोटिंग के दायरे में या सर्वे में लिया जाता तो परिणाम कुछ अलग होता। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि जिन लोगों ने सर्वे में घर वोट डालने की इच्छा जाहिर की और होम वोटिंग के लिए फार्म भराए उनके वोट घर पर ही बैलेट पेपर से डलवाए गए हैं। लेकिन ये भी सच है कि चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में असहाय और चलने में असमर्थ लोग वोट डालने बूथों पर उनके परिजन लेकर पहुंच रहे थे।
जिले में मतदान करने वाले बुजुर्ग और दिव्यांगजन
दृष्टिबाधित- 803
श्रवणबाधित- 37
लोकोमोटर विकलांगता- 177
अन्य दिव्यांग 280
80+ बुजुर्ग- 20412