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मैं 27 बरस का दौसा जिला…

दौसा जिले के 28वें स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं

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मैं दौसा जिला। आज मेरी 27वीं वर्षगांठ है और 28वां स्थापना दिवस। यूं तो मेरा इतिहास प्राचीनकालीन है, लेकिन आधुनिक भारत में जिले के रूप में राजस्थान राज्य के 29वें जिले के रूप में 10 अप्रेल 1991 को मान्यता दी गई। तब जिले में दौसा, बसवा, सिकराय व लालसोट तहसील थी। मुझे जयपुर जिले से अलग कर के बनाया गया था। 15 अगस्त 1992 को सवाईमाधोपुर से अलग कर महुवा को भी मुझमें शामिल कर दिया गया। समय के साथ-साथ मेरा विस्तार होता गया। जिले में दौसा, लालसोट, महुवा, सिकराय, बांदीकुई, नांगल राजावतान व रामगढ़ पचवारा उपखण्ड मुख्यालय स्थापित हैं। 50 से अधिक सरकारी विभागों के दफ्तर हैं। 9 तहसील व 6 पंचायत समितियां हैं। जिले से एक लोकसभा व दो राज्यसभा में सांसद हैं। स्थानीय व मूल निवासी सब मिलकर 8 विधायक हैं। देश से लेकर राज्य की राजनीति में दौसा का डंका हमेशा बजा है।


यह तो हुई मेरे ऊपरी अनावरण की बात, लेकिन अंदर से मेरी तकलीफ भी कम नहीं है। जिला बनने के बाद मैंने सोचा था कि हालात सुधरेंगे। मेरे आगोश में आशियाना लेकर बैठे लोगों को उम्मीद थी कि मूलभूत सुविधाएं बेहतर ढंग से मिलने लगेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। लोगों को शुद्ध तो दूर पीने के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। गर्मी के शुरू होते ही चारों तरफ हाहाकार मचने लग गया है। पानी का कारोबार करने वालों को पानी मिल रहा है, लेकिन मेरे लोगों को पानी के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है। अन्नदाता को खेतों की सिंचाई के लिए पानी के साथ बिजली भी नहीं मिलती। जमीन खोदकर पानी निकालने की होड़ में मेरी कोख सूखने लगी है। बीते 27 सालों में सड़कों का विस्तार तो हुआ है, लेकिन देखभाल पर ध्यान नहीं दिया जाता।

मेरे मुख्यालय पर ही अधिकतर कॉलोनियों में सड़कें छलनी हो रही हैं। देश में स्वच्छता का हो-हल्ला हो रहा है, लेकिन गांव-शहरों में सड़कों पर कचरा व सड़ांध मारती नालियां नाक सिकोडऩे का आज भी मजबूर करती हैं। जितने अस्पताल खुल रहे हैं, उससे तेजी से बीमारियां बढ़ रही हैं। आज भी मुझ में बसने वालों को राजधानी जयपुर ही जाना पड़ रहा है। मेरे बच्चों में शिक्षा की अलख जगी है, लेकिन स्तरीय पढ़ाई के लिए दूसरे शहर जाना उनकी मजबूरी है।


मेरा दर्द बीते एक दशक से तेजी से बढ़ा है, जब से सामाजिक सौहार्द को भी आंच आने लगी है। रिश्तों में ही अपराध होने लगा है। औद्योगिक विकास थम सा गया है। रेलनगरी बांदीकुई की पहचान गुम हो गई है तो सिकंदरा का पत्थर कारोबार भी कमजोर हो चला है। भाण्डारेज, बालाहेड़ी, लवाण जैसे कस्बों के कुटीर उद्योग भी मृतप्राय: हैं। लालसोट में कृषि भी पहले जैसी नहीं रही। बाजारों के खूबसूरत नजारे को अवैध कब्जों व मनचाहे तरीके से पैर पसारने वालों ने बिगाड़ दिया है। वाहनों के धुएं ने फिजां में जहर घोल दिया है। नए के चक्कर में मेरा पुराना स्वरूप बिखरता जा रहा है।


खैर, मेरे स्थापना दिवस पर उम्मीद करता हूं आपसी प्रेम व सौहार्द से सब मेरी तरक्की और विकास के लिए काम करें, क्योंकि मेरा अस्तित्व जितना मजबूत होगा, उतना ही मेरे बाशिंदों का भला होगा। हां, मैं 27 बरस का दौसा जिला हो गया हूं।

हृदय स्थल गांधी तिराहा से हर तरफ रास्ता

दौसा में गांधी तिराहा हृदय स्थल से जिले में किसी भी तरफ जा सकते हैं। प्रतिमा के पीछे लालसोट रोड है जो सवाईमाधोपुर जिले को जोड़ती है। दाईं ओर से मार्ग सिकराय, बांदीकुई व महुवा के अलावा अलवर, भरतपुर जिले में जाता है। बाएं तरफ का रास्ता राजधानी जयपुर को जाता है। दौसा से नेशनल हाइवे के अलावा जयपुर-दिल्ली व जयपुर-भरतपुर रेल मार्ग भी निकल रहा है।

ऐतिहासिक महत्व


दौसा ढूंढार राज्य व कच्छवाह राजपूतों की राजधानी रहा। चौहानो और बडग़ुर्जरों ने राज्य किया। अरावली पर्वतमाला की तलहटी में स्थित किला शत्रुओं के लिए अभेध था। सूप (छाज) के आकार में बना ये किला तीन तरफ विशाल दुर्ग व पीछे की तरफ पहाड़ी से घिरा है। सुरक्षा की दृष्टि से किले में प्रवेश के लिए तीन बड़े व मजबूत दरवाजे थे। विषम परिस्थितियों में किले में प्रवेश के लिए सामने की तरफ एक छोटा गेट बनाया हुआ है, जिसे हाथी पोल कहा जाता था।

आभानेरी से विश्व में पहचान, बालाजी की महिमा अपार


बांदीकुई उपखण्ड में स्थित आभानेरी की चांदबावड़ी से जिले की विश्व पर्यटन मानचित्र पर जगह बनी है। यहां देश-विदेश से प्रतिदिन आठवीं सदी में निर्मित चांदबावड़ी को देखने बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, लेकिन उनको विश्वस्तरीय सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। इसके अलावा धार्मिक क्षेत्र में मेहंदीपुर बालाजी की महिमा भी देशभर में है। जिले के कईअन्य धार्मिक स्थल भी देशभर में पहचान रखते हैं। दौसा के पंच महादेव मंदिर , लालसोट में पपलाज माता व बीजासणी माता मंदिर, भाण्डारेज व आलूदा की बावडिय़ां, बांदीकुई का दुर्बलनाथ मंदिर व चर्च भी प्रसिद्ध स्थल हैं। जिले में पर्यटन विकास भी गति नहीं पकड़ पाया।

आंकड़ों की नजर में जिला


जनसंख्या- 16 लाख 34 हजार 409
क्षेत्रफल- 3432 वर्ग किलोमीटर
जनसंख्या घनत्व- 476 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
(सभी आंकड़े 2011 की जनगणना रिपोर्ट के आधार पर)
लिंगानुपात- 930
साक्षरता दर- 68.16
ग्राम पंचायत-234
उप तहसील- 7
पटवार मण्डल 263
पुलिस थाने-19
पुलिस सर्किल-5
विधानसभा क्षेत्र-5
नगर निकाय-3
अस्पताल- 478