
महुवा को नगरपालिका का दर्जा मिलने से बजट मिला तो लगे विकास को पंख
महुवा. ग्राम पंचायत महुवा को नगरपालिका का दर्जा मिलने के साथ ही विकास की गति भी बढऩा शुरू हो गया है। क्योंकि सरकार की ओर से सुविधाओं में इजाफा करनेे के साथ ही मोटा बजट भी विकास कार्यों के लिए मुहैया कराना शुरू कर दिया है। इससे लोगों में विकास की आस जगी है।
If Mahuva gets the status of Municipal Corporation, then development
सूत्रों के अनुसार अप्रेल 2017 में पालिका बनने के बाद ढाई वर्ष में करीब 7 करोड़ रुपए के विकास कार्य कराए गए हैं। इसमें तत्त्कालीन भाजपा सरकार ने रूडीफ के तहत 6 करोड़ 32 लाख रुपए भी अतिरिक्त दिए थे, लेकिन इनमें से केवल 3 करोड़ रुपए ही नगर पालिका विकास पर खर्च कर सकी। शेष राशि टेण्डर प्रक्रिया कम दर पर होने से बजट खर्च नहीं हो सका और राशि वापस भेज दी गई। वहीं सरकार की ओर से शहर में करीब 14 सौ दूधिया एलईडी लाइट लगाई गई। इससे शाम होते ही पुराना महुवा रोशनी से जगमगा उठने लगा है।
ग्राम पंचायत को पालिका का दर्जा मिलने पर दमकल कार्यालय भी खुल गया। यहां राज्य सरकार की ओर से दमकल वाहन भी मुहैया करा दिया। सफाई व्यवस्था दुरूस्त किए जाने के लिए करीब 9 चौपहिया वाहन एवं अन्य संसाधनों में भी विस्तार किया गया है। पालिका बनने से अब बजट की कमी की समस्या से भी निजात मिलने लगी है। क्योंकि अब पालिका बनने से की राजस्व आय भी बढ़ गई है।
सफाईकर्मियों में जगी स्थाईकरण की उम्मीद
ग्राम पंचायत महुवा को नवसृजित नगरपालिका का दर्जा मिलने के साथ ही लम्बे समय से ठेके पर कार्यरत स्वच्छकार(सफाईकर्मियों) को अब स्थाई होने की उम्मीद जगी हैं। हांलाकि पालिका बोर्ड की बैठक में इन सफाईकर्मियों को नियमित किए जाने का प्रस्ताव लेकर स्थानीय निकाय जयपुर को भेजा जा चुका है। ग्राम पंचायत होने के समय 84 सफाईकर्मी कार्यरत थे।
इसके बाद नगरपालिका बनने पर इन्हें बढ़ा कर 98 कर दिया और अब 35 अतिरिक्त सफाईकर्मी ओर लगा लिए गए हैं। जो कि सुबह से ही शहर की साफ-सफाई में जुट जाते हैं। इससे शहर के सौन्दर्यकरण को भी बढ़ावा मिला है। फिलहाल इन्हें न्यूनतम मजूदरी मिल रही है। इसमें इन सफाईकर्मियों को घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। सफाईकर्मियों का कहना है कि अब उनकी आवाज सुनने के लिए पार्षद व चेयरमैन निर्वाचित होंगे।
इससे उनके स्थाईकरण की मांग सरकार के समक्ष रख सकेंगे। हालांकि इन सफाईकर्मियों ने नगरपालिका बनने के साथ ही स्थाईकरण की मांग को लेकर हड़ताल भी की और करीब एक माह तक सफाई व्यवस्था ठप हो गई थी। अब इन 133 सफाईकर्मियों के परिवारों में भी खुशी का माहौल है।
पहले दिन एक भी नहीं भरा नामांकन
नगरपालिका चुनाव को लेकर नामांकन भरने के पहले दिन शुक्रवार को एक भी प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल नहीं किया है। उपखण्ड अधिकारी रतनलाल योगी ने बताया कि पहले दिन एक भी नामांकन नहीं भरा गया है। हालांकि 22 संभावित प्रत्याशियों ने अमानता राशि जमा कराई है। आवेदन पत्र लेने के लिए सुबह से ही एसडीओ कार्यालय में लोगों की भीड़ लगी रही। वहीं पालिका कार्यालय मे भी एनओसी के लिए दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहने से मेला जैसा माहौल नजर आया।
प्रत्याशियों के पैनल तैयार किए जा रहे हैं
कांग्रेस की प्रत्याशी चयन समिति की बैठक मिडवे में हुई। इसमें प्रत्येक वार्ड से 3 - 3 लोगों का पैनल तैयार किया गया। जिलाध्यक्ष रामजीलाल ओढ़ ने बताया कि पैनल प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भेज दिया है। अब इस पैनल के हिसाब से वाडऱ्ों में जाकर मतदाताओं से रायशुमारी करेंगे। इसके बाद आगामी 3 नवम्बर को बैठक आयोजित कर सिंगल नाम का चयन कर प्रत्याशी घोषित किए जाएंगे। बैठक में पूर्व जिला प्रमुख अजीतसिंह, ब्लॉक अध्यक्ष रामनारायण मीणा, अजय बौहरा, शंकरलाल हुड़ला, नगर अध्यक्ष देवेन्द्र खण्डेवाल शामिल थे।
वहीं भाजपा की ओर से भी पैनल बनाकर प्रदेश कार्यालय को भेज दिए गए हैं। जिलाध्यक्ष घनश्याम बालाहेड़ी ने बताया कि प्रभारी ज्ञानदेव आहुजा, विधानसभा प्रत्याशी रहे पूर्व प्रधान राजेन्द्र मीणा, संगठन मंत्री अजीत मेहता, टीकमसिंह, मण्डल अध्यक्ष राकेश बंसल, अभिषेक सांंथा, हेमेन्द्र तिवाड़ी व सांसद जसकौर मीणा सहित अन्य पदाधिकारियों की सहमति से 3 से 4 लोगों का पैनल बनाया है। अब शीघ्र ही प्रत्याशियों की सूची जारी की जाएगी। वहीं वाडऱ्ों के लोग प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर जोड़तोड़ की गणित में जुट गए हैं। वाडऱ्ों में भी दावेदारों ने मतदाताओं से सम्पर्क साधना शुरू कर दिया है। इससे शहर में चुनावी रंगत दिखाई देने लगी है।
If Mahuva gets the status of Municipal Corporation, then development
Published on:
02 Nov 2019 08:04 am
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