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अनदेखी: आवारा पशु बने दुर्घटना के सबब, प्रशासन का नहीं कोई ध्यान

आए दिन लोग हो रहे चोटिल, किसानों का छीना सुकून

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अनदेखी: आवारा पशु बने दुर्घटना के सबब, प्रशासन का नहीं कोई ध्यान

कचरा पात्र में मुंह मारते आवारा मवेशी।

दौसा. शहर की सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा रहने से आए दिन दुर्घटना हो रही हैं, लेकिन प्रशासन का इनको पकडऩे की ओर कोई ध्यान नहीं है। आवारा पशुओं की चपेट में आने से अब तक कई जने घायल हो चुके हैं। वहीं सड़कों पर अचानक आ जाने से चालकों के संतुलन खो देने से वाहन पलट जाते हैं। बीते पखवाड़े में भी सिकंदरा थानान्तर्गत हाईवे पर अचानक आवारा मवेशी के आ जाने से दो बसों में भिड़ंत हो गई। वहीं दुब्बी चौकी समीप आवारा पशु के टकराने से कार सवार एक ही परिवार के चार जने घायल हो गए।
रात में फसल को बचाना चुनौती: किसानों के लिए भी फसलों को सुरक्षित रखना मुश्किल होता जा रहा है। दिन के समय तो जैसे-तैसे किसान फसल की रखवाली कर लेते हैं, लेकिन सर्दी की रात में फसल को बचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। शाम ढलते ही वन्य जीव व आवारा मवेशी खेतों का रुख कर लेते हैं। शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा देखा जा सकता है। कई बार तो ये पशु बीच सड़क पर लड़ाई कर लोगों को घायल कर देते हैं तो कई वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर देते हैं। आवारा पशुओं को पकडऩे के लिए परिषद ने भी कोई व्यवस्था नहीं कर रखी है।
तारबंदी के बावजूद खेतों में कर रहे नुकसान: फसलों के लिए ग्रहण बन चुके आवारा पशुओं के आतंक ने किसानों का सुख चैन छीन लिया है। किसान टॉर्च की रोशनी में आवारा मवेशियों को देखते रहते हैं। खेतों पर तारबंदी भी करवा रखी है। फिर भी वे तारबंदी को लांघकर खेतों में पहुंच जाते है।

घायल पशुओं की कोई नहीं लेता सुध
हाइवे पर आए दिन सड़क हादसे में कई पशु घायल हो जाते हैं। उन घायल पशुओं को हाइवे कर्मचारी सड़क किनारे डाल देते हैं। इन घायल पशुओं की प्रशासन की ओर से कोई सुध नहीं लेने से उपचार के अभाव में इनकी मौत हो जाती है। घायल पशुओं के लिए आस पास के ग्रामीणों की ओर से चारा पानी की व्यवस्था जरूर की जाती है। -राजेश सैनी

गोशाला खुले तो मिले समस्या से निजात
नेशनल हाइवे से गुजरने वाले प्रशासनिक अधिकारियों सहित राजनेताओं का हाइवे पर बैठे रहने वाले इन आवारा गायों की ओर ध्यान जाने के बाद भी इस समस्या से निजात पाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है। प्रशासन को जनसहयोग कर हर पंचायत में गोशाला खुलवा दी जाए तो इस समस्या से निजात मिल सकती है। -ङ्क्षपटू सेन

चलाते हैं अभियान
आवारा पशुओं को पकडऩे के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। गत माह ही टीम ने सड़़कों पर घूम रही आवारा गायों को गोशाला में पहुंचाने का कार्य किया है। कई लोग दूध नहीं देने पर अपने पशुओं को सूना छोड़ देते हैं। जो कि पशुओं को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं यातायात भी बाधित होता है।
विश्वामित्र मीना, नगर परिषद आयुक्त