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राष्ट्रीय आपदा में औषधालय की जगह परीक्षा में ड्यूटी दे रहे हैं चिकित्सक!

In the national disaster, doctors are giving duty in exams: कोरोना से जागरूक करने व काढ़ा वितरण प्रभावित, 65 फीसदी वैद्य मूल कार्य से दूर

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राष्ट्रीय आपदा में औषधालय की जगह परीक्षा में ड्यूटी दे रहे हैं चिकित्सक!

राष्ट्रीय आपदा में औषधालय की जगह परीक्षा में ड्यूटी दे रहे हैं चिकित्सक!

दौसा. कोरोना को सरकार राष्ट्रीय आपदा घोषित कर चुकी है। इसकी रोकथाम के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार चिकित्सा मंत्रालय के अभिन्न अंग आयुर्वेद विभाग ने आमजन में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जागरुकता कार्यक्रम व काढ़ा वितरण का कार्य शुरू किया है, लेकिन जिले में कार्यरत करीब 65 फीसदी आयुर्वेद चिकित्सकों की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा में लगाने से यह काम प्रभावित हो रहा है।

In the national disaster, doctors are giving duty in exams

गौरतलब है कि जिले में करीब 101 औषधालय हैं तथा करीब 130 आयुर्वेद चिकित्सक कार्यरत हैं। करीब 85 से अधिक वैद्य परीक्षा कार्य में लगे हैं। राज्य सरकार के आदेशानुसार जिन परीक्षा केन्द्रों पर एक से अधिक राजकीय विद्यालय के परीक्षार्थी प्रविष्ठ हो रहे हैं, ऐसे केन्द्रों पर बोर्ड परीक्षा शांतिपूर्ण व निष्पक्ष ढंग से सम्पन्न कराने के लिए माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किए जाने थे। विशेष चिह्नित, संवेदनशील, अतिसंवेदनशील, गैर राजकीय केन्द्रों पर भी शिक्षा विभाग की जगह अन्य दूसरे विभाग के माइक्रो ऑब्जर्वर लगाए गए हैं।

ऐसे में जिला प्रशासन ने करीब सात दर्जन से अधिक आयुर्वेद चिकित्सकों को माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्त कर दिया। अब अधिकतर आयुर्वेद चिकित्सक परीक्षा केन्द्र में ड्यूटी दे रहे हैं और औषधालय खाली पड़े रहते हैं। वहीं कोरोना से लोगों को जागरूक करने व काढ़ा वितरण कार्य में औपचारिकता बरती जा रही है। इस वक्त प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी कोरोना से निपटने के लिए सीधे अधिकारियों से बात कर रहे हैं, वहीं आयुर्वेद चिकित्सकों को इमरजेंसी घोषित होने के बावजूद दूसरे कार्य में लगाए रखना चर्चा का विषय बना हुआ है।


स्टाफ के भरोसे औषधालय


आयुर्वेद चिकित्सकों की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा में होने पर स्टाफ के भरोसे औषधालय रहते हैं। ऐसे में मरीजों को आयुर्वेद पद्धति का समुचित लाभ आमजन को नहीं मिल पा रहा है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट लिखा हुआ है कि जिस तारीख को परीक्षा ना हो, उस दिन आयुर्वेद चिकित्सकों को अपने पदस्थापन पर ड्यूटी देनी होगी। इसके बावजूद कुछ चिकित्सक परीक्षा में ड्यूटी देकर ही औपचारिकता पूरी करते हैं।


मनमाफिक जगह लगी ड्यूटी


कई चिकित्सकों ने अपने गृह क्षेत्र के नजदीक स्थित परीक्षा केन्द्र पर ड्यूटी लगवा ली। इससे उन्हें मूल पदस्थापन वाली जगह पर आने-जाने की परेशानी नहीं हो रही।


बड़े काम का है काढ़ा


आयुर्वेद विभाग की ओर से वितरित किए जाने वाला काढ़ा करीब 24 तरह की औषधियों से तैयार किया जाता है। इससे मौसमी बीमारियां जैसे स्वाइन फ्लू, डेंगू, वायरल आदि से लाभ होता है। साथ ही व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढऩे से बीमार होने से भी रोकता है। आमजन की भी काढ़ा का सेवन करने के लिए वितरण किए जाने वाली जगह कतारें देखी जाती है।


प्रति औषधालय 10 हजार दिए
इस बार आयुर्वेद विभाग ने काढ़ा वितरण व्यवस्था को बेहतर ढंग से चलाने के लिए प्रति औषधालय कंटीजेंसी प्लान के तहत 10-10 हजार रुपए भी दिए हैं। इसके तहत गैस चूल्हा, सिलेण्डर, बर्तन आदि की खरीद की जानी है। अब आयुर्वेद चिकित्सकों की ड्यूटी परीक्षा में लगी होने के कारण इस राशि का सदुपयोग भी अभी तक कई जगह नहीं हुआ है। खास बात यह हैकि दस दिन में ही इस राशि का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

इनका कहना है...
अधिकतर आयुर्वेद चिकित्सकों की बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी है। जिस दिन ड्यूटी नहीं होती है, उस दिन औषधालय में काम करते हैं। कोरोना के मद्देनजर सरकार ने काढ़ा वितरण के निर्देश दे रहे हैं। लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों पर कार्रवाई की जाएगी।
सुधीरकुमार चतुर्वेदी, उप निदेशक आयुर्वेद विभाग, दौसा

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