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इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना: दिनभर मेहनत के बाद मात्र 100 रुपए मिल रहे दाम

- शहरी रोजगार योजना की श्रमिकों का कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन, नगर परिषद के अधिकारियों पर लगाए आरोप

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दौसा. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए श्रमिकों ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट के सामने विरोध-प्रदर्शन किया। उन्होंने नगर परिषद के अधिकारियों पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए कलक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर अनशन करने की चेतावनी दी।


प्रदर्शन के दौरान महिला श्रमिकों ने बताया कि शहरी रोजगार योजना में सरकार ने 259 रुपए प्रति श्रमिक व 271 रुपए मेट के प्रतिदिन तय कर रखे हैं। सुबह 8 से शाम 4 बजे तक कार्य करते हैं, लेकिन नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी भेदभाव कर पैसा देते हैं। जो मेट पैसा नहीं देते उनकी लेबर को कम मेहनताना देने का आरोप भी लगाया। श्रमिकों का कहना है कि 100 से 150 रुपए तक का ही भुगतान मिला है। योजना में भ्रष्टाचार हो रहा है।

श्रमिकों के लिए कार्यस्थल पर पेयजल सहित अन्य सुविधाओं का भी इंतजाम नहीं किया जाता। शिकायत करने पर हटाने की धमकी दी जाती है। 1 दिसम्बर को जारी की गई नई मस्टररोल में कई मेटों को हटा दिया गया। ज्ञापन में श्रमिकों ने 259 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान दिलाने की मांग की।