
कलश यात्रा में खूब नाची महिलाएं
लालसोट. श्रीचन्द्रेश्वर महादेव मण्डल के तत्वावधान में चातुर्मास महोत्सव पर अखण्ड रामायण पाठ का प्रारंभ चन्द्रेश्वर महादेव मंदिर में शुक्रवार से हुआ। इससे पूर्व सुबह रामकृष्ण गायत्री मंदिर परिसर से कलश यात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। जिसमें काफी संख्या में महिलाओं ने सिर पर कलश धारण किए।
Kalash Yatra ... यात्रा ज्योतिबा सर्किल, अशोक सर्किल, जवाहरगंज, झरण्डा चौक, तहसील रोड, खोहरापाड़ा से गुजरती हुई शिव मंदिर पहुंची। यात्रा में रामचरित मानस सिर पर द्वारकाप्रसाद अग्रवाल ने धारण की तथा ध्वज पताका मुकेश कुमार निर्झरना के हाथों में थी। कलश यात्रा का बाजारों में स्वागत किया गया। मंदिर परिसर में पूजा अर्चना के साथ अखण्ड, रामायण पठन शुरू किया गया,
kalash yatra.. मण्डल अध्यक्ष सीताराम निर्झरना, पालिका उपाध्यक्ष पुरूषोत्तम जोशी, बाबूलाल हाड़ा, महेश पारासर, शंभूलाल जैन, कमलेश जोशी, सुनील पंचौली, विष्णु जोशी, राकेश सेडूलाई, मदनलाल जांगिड़, राजेश मिश्र, बनवारी लाल व्यास, कैलाश चौधरी, सीताराम पारीक, गोविन्द जसवानी, गोविन्द चौधरी, प्रदीप सोनी, कैलाश संवासा, सीताराम अग्रवाल, रामबाबू खण्डेलवाल, कैलाश साहू, प्रहलाद रड़बा सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे।
कथा श्रवण से मन को शांति -शास्त्री
सिकराय. तहसील के ग्राम हिंगवा में नाथ संप्रदाय के आसन मंदिर में चल रही भागवत कथा सप्ताह ज्ञानयज्ञ में पंडित शिंभूदयाल शास्त्री ने कहा कि धर्म करने से मनुष्य को आत्मिक सुख मिलने के साथ ही सत्य का ज्ञान होता है, वहीं ईश्वर के प्रति आस्था बढ़ती है। भागवत कथा श्रवण से मन को शांति मिलती है। प्रभु की भक्ति करने से ही मनुष्य का कल्याण संभव है और धर्म करने से आत्मिक सुख की प्राप्ति होती ह।इससे पहले सुबह वैदिक मंत्रोचार के साथ यज्ञ में आहुतियां दिलाई गई।लक्ष्मण नाथ, महाराजनाथ, निहालसिंह गुर्जर सहित ग्राम खेड़ी, पीलोड़ी, चांदूसा, गनीपुर, हीगवा गांव के ग्रामीण मौजूद थे।
देवशयनी एकादशी का बताया महत्व
लालसोट.
गुरू पूर्णिमा पर्व के उपलक्ष्य में रामकृष्ण गायत्री माता मंदिर में जारी संगीतमय श्रीरामकथा में शुक्रवार को राम -सुग्रीव की मित्रता के साथ देवशयनी एकादशी के महत्व पर कथा वाचक अयोध्या निवासी महंत कृष्णबिहारी दास ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि देवशयनी एकादशी तमाम पापों का नाश करती है। भगवान विष्णु को समर्पित यह एकादशी मनोरथ पूर्ण करती है। भगवान विष्णु चार मास के लिए योग निंद्रा में चले जाते हैं तो शुभ कार्यो को नहीं किया जाता है। भगवान विष्णु का व्रत रखने वाला धन धान्य से परिपूर्ण होने के साथ पापों से मुक्ति पाता है। भजनों पर श्रोताओं ने नृत्य किया।
Published on:
13 Jul 2019 03:39 pm
बड़ी खबरें
View Allदौसा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
