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राजस्थान की इस सीट पर अब तक का सबसे रोचक चुनाव, आखिरी क्षण तक अटकी रही सांसें

Rajasthan Loksabha Election : दौसा सीट पर लोकसभा चुनाव के इतिहास पर नजर डाली जाए तो 1999 का चुनाव सबसे रोचक रहा था। प्रचार से लेकर मतदान व मतगणना तक एक-एक वोट की मारामारी हुई थी। मतगणना के आखिरी दौर में तो भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं से लेकर लाखों मतदाताओं की सांस अटक गई थी।

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दौसा

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Kirti Verma

Apr 17, 2024

गौरव कुमार खंडेलवाल
Rajasthan Loksabha Election : दौसा सीट पर लोकसभा चुनाव के इतिहास पर नजर डाली जाए तो 1999 का चुनाव सबसे रोचक रहा था। प्रचार से लेकर मतदान व मतगणना तक एक-एक वोट की मारामारी हुई थी। मतगणना के आखिरी दौर में तो भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं से लेकर लाखों मतदाताओं की सांस अटक गई थी। एक-एक वोट की लड़ाई दोनों प्रत्याशियों के बीच हुई। दौसा शहर की सड़कों पर हजारों लोग परिणाम जानने के लिए जमा थे। आखिरकार तब बाजी कांग्रेस के हाथ लगी। भाजपा के प्रत्याशी को एक बार फिर मात खानी पड़ी। हालांकि परिणाम को लेकर तब कई तरह के सवाल उठाए गए थे, लेकिन नतीजा नहीं बदला।

वर्ष 1999 में दौसा से चार बार जीत चुके कद्दावर नेता राजेश पायलट को ही कांग्रेस ने फिर से मैदान में उतारा। उनके सामने बीजेपी ने 1998 में पराजित हुए रोहिताश्व शर्मा को ही दोबारा मौका दिया। मुकाबला बहुत कांटे का हुआ। प्रचार-प्रसार में पूरी ताकत झोंक दी गई। अब से पहले के चुनावों में राजेश पायलट को इतनी कड़ी टक्कर नहीं मिली थी, जितनी 1999 में थी।

पायलट की राष्ट्रीय नेता की छवि होने के कारण देशभर की निगाह उनकी सीट पर थी। वहीं बीजेपी ने भी पूरा जोर लगा दिया था पायलट को रोकने के लिए। आमजन की भी इस चुनाव में खासी रुचि देखी गई। तब देश में अटलबिहारी वाजपेयी की लहर थी। ऐसे में लगातार तीन बार जीत चुके पायलट के सामने यह चुनाव खासा चुनौतीपूर्ण हो गया था। मतदान के दिन दोनों प्रत्याशियों ने खासी भाग-दौड़ की। कड़ी टक्कर के बीच 59.62 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान का प्रतिशत ना ज्यादा कम रहा ना अधिक रहा। ऐसे में मामला और उलझ गया। राजनीतिक विश्लेषक अंदाजा नहीं लगा पा रहे थे कि ऊंट किस करवट बैठेगा।
मतगणना के दिन पहले राउंड से ही उठापटक चलती रही। कभी भाजपा आगे तो कभी कांग्रेस आगे रही। दोनों के बीच कांटे की टक्कर चली।

आखिरकार अंतिम दौर में बाजी कांग्रेस के राजेश पायलट के हाथ लगी। उन्होंने मात्र 6 हजार 902 मतों से जीत दर्ज कर ली। भाजपा के रोहिताश्व को लगातार दूसरी हार झेलनी पड़ी। तब भाजपाइयों ने मतगणना पर कई सवाल उठाए थे, लेकिन निर्वाचन आयोग ने आपत्तियां मानी नहीं।

आखिरी चुनाव था पायलट का

1999 के जिस चुनाव में राजेश पायलट को सबसे कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ा था, वह उनका आखिरी चुनाव था। करीब एक साल बाद 11 जून 2000 को पायलट का दौसा के भंडाना के समीप सडक़ दुर्घटना में निधन हो गया था। इसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी रमा पायलट को कांग्रेस ने टिकट दिया। वहीं भाजपा ने गत चुनाव में मामूली अंतर से हारने वाले रोहिताश्व शर्मा को तीसरी बार दौसा से टिकट दिया। इस चुनाव में रमा पायलट ने रोहिताश्व को 65 हजार 264 मतों से पराजित कर अपने पति की सीट को कांग्रेस के लिए बरकरार रखा।