
स्ट्रॉबेरी का खेत। फोटो- पत्रिका
दौसा। खेती में बदलाव की नई कहानी लिखते हुए श्याम विश्वविद्यालय, दौसा ने आधुनिक तकनीकों के सहारे स्ट्रॉबेरी उत्पादन का सफल मॉडल तैयार किया है। विश्वविद्यालय परिसर में 4 बीघा भूमि पर की गई इस उन्नत खेती से करीब 15 लाख रुपए के उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है, जो किसानों के लिए नई राह खोल रही है।
कृषि विभाग की यह पहल असिस्टेंट प्रोफेसर विमल शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित हो रही है। उनके नेतृत्व में मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई, उन्नत किस्मों का चयन और पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग जैसे आधुनिक तरीकों को अपनाया गया है। इन तकनीकों के जरिए कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा रहा है, जिससे खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ नकदी फसलों की ओर भी प्रेरित करना है, ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके।
विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलपी शर्मा ने इसे किसानों के लिए उपयोगी प्रयोग बताते हुए कहा कि इस तरह की पहल से कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती को बढ़ावा मिलेगा। स्ट्रॉबेरी की इस खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे प्रशिक्षण मॉडल के रूप में भी विकसित किया गया है। स्थानीय किसानों को खेत तैयार करने, पौध रोपण, सिंचाई प्रबंधन और फसल संरक्षण तक की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है। इससे किसान अपने खेतों में भी इसी तकनीक को अपनाकर बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि ऐसे नवाचार खेती को आधुनिक बनाने के साथ युवाओं को भी इस क्षेत्र की ओर आकर्षित करेंगे। खास बात यह है कि इस वर्ष स्ट्रॉबेरी की प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है, जिसमें जैम, जूस और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इससे किसानों को मूल्य संवर्धन के जरिए अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिलेंगे। इस तरह श्याम विश्वविद्यालय का यह प्रयास न केवल तकनीकी खेती को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि किसानों के लिए लाभकारी और टिकाऊ कृषि मॉडल के रूप में उभर रहा है।
Published on:
01 Apr 2026 06:08 pm
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