
रोट तैयार करते हुए। फोटो- पत्रिका
पोकरण (जैसलमेर)। कस्बे में हनुमान जन्मोत्सव गुरुवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर बांकना हनुमान और सालमसागरधीश हनुमान मंदिरों में विशालकाय ‘एकल रोट’ का प्रसाद तैयार किया जा रहा है। परंपरा के अनुसार रामभक्त हनुमान को रोटे के चूरमे का भोग प्रिय है।
इस बार 351 किलो आटे से तैयार एकल रोट से करीब एक हजार किलो चूरमा बनेगा। इसमें लगभग 200 किलो दूध, 100 किलो घी, 70-80 किलो शक्कर, 20 किलो सूखा मेवा और 10 किलो इलायची पाउडर डाला जाएगा। विशाल रोट बनाने की प्रक्रिया दो दिन तक चलती है। पहले आटे को दूध से गूंथकर परात में रोट की आकृति दी जाती है।
इसके बाद इसे सूती कपड़े और जूट के बारदानों से ढककर भाप में पकाया जाता है। फिर रोट को गोबर की थेपड़ियों पर अंगारों से ऊपर और नीचे से गर्म करके 36 से 48 घंटे में पूरी तरह पकाया जाता है। बांकना में जगदीश जोशी और सालमसागरधीश में जगदीश पालीवाल के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम इस कठिन प्रक्रिया को अंजाम देती है। तैयार चूरमा हनुमानजी को अर्पित कर हजारों श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।
वहीं जैसलमेर शहर के पुराने बिजलीघर परिसर स्थित गजटेड हनुमान मंदिर में गुरुवार को हनुमान जयंती महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। आयोजन को लेकर तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं और मंदिर परिसर को आकर्षक लाइटिंग, फूलमालाओं और सुसज्जित टेंट से सजाया गया है। महोत्सव के तहत प्रातः पंचामृत स्नान और आरती-पूजन के बाद सुबह 9 बजे शोभायात्रा निकलेगी। शोभायात्रा गडीसर चौराहे से प्रारंभ होकर आसनी रोड, गोपा चौक, सदर बाजार, गांधी चौक और हनुमान चौराहे से होते हुए मंदिर पहुंचेगी।
इसमें सजे-धजे ऊंट-घोड़े, विभिन्न देवी-देवताओं की झांकियां, बैंड-डीजे, दुपहिया वाहन तथा मंगल कलश धारण किए बालिकाएं शामिल रहेंगी। हाथों में ध्वज लिए बालक शोभायात्रा का आकर्षण बढ़ाएंगे। झांकियों में भाग लेने वाले बालक-बालिकाओं को पुरस्कृत भी किया जाएगा। महोत्सव की शुरुआत नवग्रह पूजन, कलश स्थापना और गणेश स्तुति से की गई।
बुधवार प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में अखंड रामायण पाठ आरंभ हुआ, जिसने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया। गुरुवार को दिनभर यज्ञ, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान होंगे। संध्या 7 बजे महाआरती के बाद महाप्रसादी वितरण और सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन किया जाएगा। आयोजन से पहले शहर में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है।
Published on:
01 Apr 2026 03:43 pm
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