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नरेशपुरी मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के महंत, ओढ़ाई चादर

dausa वैदिक मंत्रोच्चार व चादर रस्म के बाद महंत की गद्दी पर हुए आसीन, 41 साल पहले वंश परंपरा से किशोरपुरी महाराज ने चुना था उत्तराधिकारी
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दौसा

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Rajendra Kumar Jain

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Updated: 22 Aug 2021, 9:40 AM IST

नरेशपुरी मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के महंत, ओढ़ाई चादर

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के महंत नरेशपुरी महाराज को चादर ओढ़ाने की रस्म के दौरान मंत्रोच्चार करते पण्डित।

दौसा/मेहंदीपुर बालाजी. सिद्धपीठ मेहंदीपुर बालाजी प्रधान महंत की गद्दी पर नरेशपुरी गोस्वामी को संतों व पंच-पटेलों ने सर्वसम्मति से महंत के पद पर आसीन किया।
आरती हॉल में आयोजित कार्यक्रम में शनिवार को संत परंपरा के अनुसार पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना संपन्न कराई। इसके बाद सबसे पहले महंत परिवार, इसके बाद अयोध्या के हनुमानगढ़ी के संतों व आसपास के 15 गांवों के पंच पटेल व प्रबुद्धजनों ने चादर ओढ़ाकर विधिवत रस्म निभाई।
समारोह के दौरान दर्जनों पंडितों द्वारा किए गए वैदिक मंत्रोचार से बालाजीधाम पूरी तरह भक्ति रंग में रंग गया और महंत नरेशपुरी महाराज के जयकारे गूंज उठे।
विहिप, बजरंग दल सहित अनेक सामाजिक धार्मिक व राजनीतिक संगठन के पदाधिकारियों ने महंत नरेशपुरी को शुभकामनाएं दी।
गौरतलब है कि ब्रह्मलीन महंत किशोरपुरी ने वंश परंपरा के अनुसार 12 अक्टूबर 1979 को विधिवत रूप से नरेशपुरी गोस्वामी को अपना उत्तराधिकारी चुना था। जबकि 55 साल पहले गणेशपुरी महाराज ने किशोरपुरी महाराज को महंत की गद्दी पर आसीन किया था। नरेश पुरी महाराज ने बाल्यकाल में ही गुरु किशोर पुरी महाराज से दीक्षा ली थी, लेकिन गत दिनों उनके देवलोक गमन पर उनकी मंशा अनुसार उत्तराधिकारी घोषित किए गए नरेशपुरी महाराज को शनिवार को विधिवत महंत चुना गया।

घोषित की जनकल्याण व सामाजिक सरोकार की पंच विकास योजनाएं
महंत नरेशपुरी महाराज ने शनिवार को प्रधान महंत की गद्दी पर आसीन होते ही पंच विकास योजनाओ को नए सिरे से मूर्त रूप देने की घोषणा की।
इस दौरान उन्होंने श्री बालाजी महाराज मंदिर में दर्शन व्यवस्था, भोग व्यवस्था एवं मंदिर से सम्बंधित सभी आवश्यक जानकारी की ऑनलाइन व्यवस्था, बालाजी महाराज मंदिर के जीर्णोद्धार निर्माण कार्य को तेज गति से कम समय में पूरा करना, मंदिर में दर्शनार्थियों के लिए जन उपयोगी सुविधाओं का विस्तार करना, महंत किशोरपुरी स्मृति कॉलेज के माध्यम से एक वर्षीय नि:शुल्क पीजीडीसीए कोर्स का इसी सत्र से प्रारंभ एवं कंप्यूटर टीचर की भर्ती को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने, वर्ष 2022 में गुरुकुल की तर्ज पर वैदिक संस्कृती की सभी विधाओ जैसे ज्योतिष, कर्मकांड, योग, वास्तु, वैदिक शिक्षा के उच्च स्तरीय तकनीकी संस्थान का प्रारंभ करने की घोषणा की। इसके अलावा आमजन की सहमति और सहयोग से जनकल्याणकारी कार्यों को और गति दी जाएगी।