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Govardhan Puja 2017# मानसी गंगा श्रीहरि दे…गिरधर की परिक्रमा दे

दौसा जिला मुख्यालय स्थित गिरिराज धरण मंदिर में गोवर्धन की सामूहिक पूजा।  

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dausa goverdhan pooja

दौसा. दौसा जिला मुख्यालय स्थित गिरिराज धरण मंदिर में गोवर्धन की सामूहिक पूजन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। यहां गोबर से गोवर्धन की विशाल प्रतिमा बनाकर शहरभर से श्रद्धालु पूजन करने आए। सामूहिक रूप से 'मानसी गंगा श्रीहरि दे... गिरधर की परिक्रमा दे... कुण्ड कुण्ड चरणामृत ले... अपना जन्म सफल कर ले... मानसी गंगा श्रीहरि दे' बोलकर परिक्रमा दी। भगवान के भोग लगाया गया। इसके बाद जयकारों से मंदिर गुंजायमान हो गया। शानदार आतिशबाजी भी की गई।

इस मौके पर गिरिराज धरण मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया। लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी। स्थानीय कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए। इसके अलावा घर-घर एवं अन्य मंदिरों में भी गोवर्धन पूजा की गई। शाम छह से आठ बजे तक पूजन का दौर चला। इस मौके पर अन्नकूट का भोग लगाया। घरों में दाल-बाटी व चूरमा बनाया। पूजन के बाद जमकर आतिशबाजी की।

उल्लेखनीय है कि दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पर्व मनाया जाता है। इस पर्व के दिन शाम के समय खास पूजा रखी जाती है। इसी दिन श्रीकृष्ण ने इंद्र का मानमर्दन कर गिरिराज की पूजा की थी। इस दिन मंदिरों में अन्नकूट किया जाता है। गोबर का गोबर्धन बनाया जाता है इसका खास महत्व होता है। सुबह-सुबह गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है। यह मनुष्य के आकार के होते हैं। गोवर्धन तैयार करने के बाद उसे फूलों और पेड़ों का डालियों से सजाया जाता है।

गोवर्धन को तैयार कर शाम के समय इसकी पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल, खील, बताशे आदि का इस्तेमाल किया जाता है। गोवर्धन में ओंगा यानि अपामार्ग की डालियां जरूर रखी जाती हैं। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं ये माना जाता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने वृंदावन के पूरे क्षेत्र को भारी बारिश से बचाया था। इस दिन उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपने हाथ की छोटी अंगुली पर उठा लिया था और पूरे वृंदावन गांव को भारी बारिश और तूफान से बचाया था। माना जाता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने स्वर्गलोक के राजा भगवान इन्द्र को पराजित किया था।


भगवान कृष्ण ने वृंदावन धाम के लोगों से कहा कि प्राकृति की पूजा करें, क्योंकि प्राकृति ही उन्हें सब कुछ देती है। उन्होनें गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए सभी को कहा। इससे वो लोगों को प्राकृति के प्रति जागरुक करना चाहते थे। इसलिए ही इसदिन को गोवर्धन पूजा कहा जाता है।

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